Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Bagh

by Kedarnath Singh
Save 35% Save 35%
Current price ₹192.00
Original price ₹295.00
Original price ₹295.00
Original price ₹295.00
(-35%)
₹192.00
Current price ₹192.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789381010341
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 64
  • Original Price: INR 295.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): General

...बाघ कविता ने अद्भुत ढंग से झकझोरा । सोचता रहा बाघ है क्या? क्या वह कोई प्रतीक है या कोई विराट बिम्ब, जिसमें अनेक चित्र और रूपक समाहित हो जाते हैं। असल में हम बाघ को तीन या चार धरातलों पर पढ़ सकते हैं - बाघ जो था, बाघ जो अब नहीं है, बाघ जिसकी हमें तलाश है और उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण वह जो बाघ कभी था ही नहीं। तलाश का यह सम्मोहन-भरा रूपक इन चार धरातलों पर कार्य करता हुआ अन्ततः हमें एक ऐसी अन्तरिम स्थिति में बाँधे रहता है, जहाँ वे चारों धरातल एक साथ सक्रिय होते हैं । एक विलक्षण बात यह है कि यह अन्तरिम स्थिति सन्देह की नहीं, बल्कि एक सत्य के साक्षात्कार की होती है जो जन्म लेता है वास्तविक और 'प्रतीयमान' की अन्तःक्रिया के तनाव से, जिसे हमारे जीवन के संवेदनशील तन्तु निरन्तर झेलते हैं । बाघ की पूरी बनावट को उसकी आधारभूत नाटकीयता यहीं से मिलती है ।इस ढलती हुई शताब्दी के इस अन्धे मोड़ पर बाघ दरअसल समय के विध्वंसों के ख़िलाफ़ मनुष्य के संघर्ष की लोकगाथा है। कई बार लगता है-और कविता का हर टुकड़ा इस गुंजाइश को कहीं-न-कहीं बचाये रखता है-कि वस्तुतः यह मायावी समय ही 'बाघ' है-या हमारी चेतना, हमारा प्रेम, हमारा भोलापन, हमारा नैराश्य यानी वह अपरिवर्त्य तलछट जो हमेशा बची रहती है। मुझे लगता है कि बाघ जो शहर का तिरस्कार करता है, वह दरअसल हमारी विकृति को तिरस्कृत करता हुआ हमारा अपना प्रेम है। बाघ जहाँ मिथक की ओट खोजता है, वहाँ वह जैसे हमारी ही दो फाँक चेतना का एक अंश है। हरे खेत के लाल ट्रैक्टर से ईर्ष्या करने वाला बाघ जीवन के प्रति हमारी लालसा का दूसरा नाम है।܀܀܀܀܀܀कभी हंगरी भाषा के कवि यानोश पिलिंस्की की एक कविता पढ़ी थी और उस कविता में अभिव्यक्ति की जो एक नयी सम्भावना दिखी थी, उसने मेरे मन में पंचतन्त्र को फिर से पढ़ने की इच्छा पैदा कर दी थी। उस कविता में जो एक पशुलोक था - बल्कि एक भोली-भाली पशुगाथा- मुझे लगा कि पंचतन्त्र में उसका एक बहुत पुराना और अधिक आत्मीय रूप पहले से मौजूद है। पंचतन्त्र की संरचना की अपनी कुछ ऐसी ख़ूबियाँ हैं जो सतह पर जितनी सरल दिखती हैं, वस्तुतः वे उतनी सरल हैं नहीं। हर कालजयी कृति की तरह पंचतन्त्र का ढाँचा भी अपनी आपात सरलता में अननुकरणीय है। पर मुझे लगा कि पंचतन्त्र एक ऐसी कृति है जो एक समकालीन रचनाकार के लिए जितनी चाहे बड़ी चुनौती हो, पर ज़रा-सा रुककर सोचने पर वह सृजनात्मक सम्भावना की बहुत-सी नयी और लगभग अनुद्घाटित परतें खोलती सी जान पड़ेगी। मुझे यह भी लगा कि एक बार यदि उस ढाँचे की कार्य-कारण- बद्ध श्रृंखला को थोड़ा ढीला कर दिया जाये तो इस सम्भावना को कई गुना और बढ़ाया जा सकता है। वस्तुतः सृजनात्मक सत्य के इसी नये साक्षात्कार से 'बाघ' का जन्म हुआ था-लगभग आड़ी-तिरछी रेखाओं के बीच घिरे एक शिशु की क्रीड़ा की तरह ।

केदारनाथ सिंह -जन्म : 19 नवम्बर 1984, चकिया (बलिया), उत्तर प्रदेश। विधिवत् काव्य-लेखन 1952-53 के आसपास शुरू किया। सन् 1954 में पाल एलुआर की प्रसिद्ध कविता स्वतन्त्रता का अनुवाद किया, जिसके ज़रिये नयी सौन्दर्य-दृष्टि और समकालीन काव्य-चेतना से पहला परिचय हुआ। कुछ समय तक बनारस से निकलने वाली अनियतकालिक पत्रिका हमारी पीढ़ी से सम्बद्ध रहे। पहला कविता-संग्रह अभी बिल्कुल अभी सन् 1960 में प्रकाशित। उसी वर्ष प्रकाशित तीसरा सप्तक के सहयोगी कवियों में से एक।काव्य-पाठ के लिए अमेरिका, रूस, कज़ाकिस्तान, इंग्लैंड, फ्रांस, इटली आदि देशों की यात्राएँ।अनेक पुरस्कारों से सम्मानित, जिनमें प्रमुख हैं : 'ज्ञानपीठ पुरस्कार', 'साहित्य अकादेमी पुरस्कार', 'मैथिलीशरण गुप्त सम्मान' (मध्य प्रदेश), 'कुमारन आशान पुरस्कार' (केरल), 'दिनकर पुरस्कार' (बिहार), 'जीवन भारती सम्मान' (ओडिसा), 'भारतभारती सम्मान' (उत्तर प्रदेश), 'गंगाधर मेहर राष्ट्रीय कविता सम्मान' (ओडिसा), 'जाशुआ सम्मान' (आन्ध्र प्रदेश), 'व्यास सम्मान' आदि।अंग्रेज़ी, स्पेनिश, रूसी, जर्मन, हंगेरियन तथा प्रायः सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में कविताओं के अनुवाद । फ्रेंच तथा इतालवी में 'बाघ' शीर्षक लम्बी कविता के अनुवाद पुस्तकाकार प्रकाशित।प्रकाशित कृतियाँ : अभी बिल्कुल अभी, ज़मीन पक रही है, यहाँ से देखो, अकाल में सारस, उत्तर कबीर और अन्य कविताएँ, तॉलस्ताय और साइकिल, बाघ, सृष्टि पर पहरा, मतदान केन्द्र पर झपकी तथा प्रतिनिधि कविताएँ (काव्य-संग्रह); कल्पना और छायावाद, आधुनिक हिन्दी कविता में बिम्बविधान, मेरे समय के शब्द, क़ब्रिस्तान में पंचायत तथा मेरे साक्षात्कार (गद्य-कृतियाँ) ।निधन : 19 मार्च, 2018 ।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us