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Bela Murjhyo Jamun Kachhar

by Kanti Khare
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788170554868
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 100
  • Original Price: INR 100.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 400 grams
  • BISAC Subject(s): General

बेला मुरझ्यो जमुन कछार - 'बेला मुरझ्यो जमुन कछार' कान्ति खरे की कहानियों का संग्रह है जो अब प्रकाशित हो रहा है। कान्ति खरे कवयित्री के रूप में अपनी भावनात्मक तरलता के लिए जानी गयीं और यहाँ उनकी कहानियाँ भी इस तरलता से वंचित नहीं हैं। इन कहानियों के सन्दर्भ फलक भिन्न-भिन्न हैं-कहीं पौराणिक, कहीं ऐतिहासिक, कहीं समसामयिक। पर सबके केन्द्र में है स्त्री, कई युगों की घनीभूत पीड़ा अपने में समाये हुए। सभी कहानियों के सृजन के नाभिदेश में उसके स्त्री होने की यातना अन्तर्भुक्त है। मातृत्व की अनुभूति उस दाहक-शामक की तरह है जो शरीर की धातुओं को राख करके जीने की संजीवनी शक्ति देने में सक्षम है।कान्ति खरे की कहानियाँ पारदर्शी, ईमानदारी और निर्मल संवेदना का साक्ष्य देती हैं। वे पाठक को छूती भिगोती और वेधती चलती है। इन कहानियों की भाषा में जो तरलता है, वह लेखिका के अन्तःउद्वेलन से फूटती है। एक तरह का भीगापन इन कहानियों का सहज प्रकृत गुण है जो अब कहानियों की दुनिया में विरल है।कान्ति खरे के पास एक अपनी भाषा थी-अपनी कथादृष्टि जैसी ही अपनी एक भाषा-दृष्टि। गहरी संवेदनशीलता के बल पर कान्ति खरे ने अपनी विलक्षण पहचान बनायी जिसका असर पाठकों के मन पर बहुत दिनों तक बना रहेगा।

कान्ति खरे - जन्म : 4 जुलाई, सन् 1936।उ.प्र. के नगर बाँदा में कायस्थ परिवार में।शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी), बी.एड., साहित्य रत्नविवाहोपरान्त म.प्र. में शासकीय सेवा, ज़िला छतरपुर (निवास स्थान) में शिक्षिका के पद पर कार्यरत (तीस वर्षों तक)।'बुन्देलखंड की राम रसिक भक्त कवयित्रियाँ' विषय पर रीवाँ वि.वि. से पीएच.डी.।'पीड़ा की कोयलिया' नाम से अभिहित सफल मंचीय कवयित्री, आकाशवाणी कलाकार, नागरिक सम्मान से पुरस्कृत।सृजित संसार : काव्य : 'चिट्ठियाँ न वापस कर देना' (गीत संग्रह), 'गंगा बहती रहे' (गीत संग्रह), 'पन्नाधाय' (खंड काव्य) एवं अन्य गीत।रेडियो रूपक : 'कुब्जा', 'पावस के नूपुर', 'कटे वृक्ष की तरह' (आकाशवाणी छतरपुर से प्रसारित)।कहानी : पत्र-पत्रिकाओं में अनेक कहानियाँ प्रकाशित संग्रह रूप में 'बेला मुरझ्यो जमुन कछार', 'मेघप्रिया' (अपूर्ण)।पारिवारिक दायित्वों, निरन्तर लेखन, चिन्तन एवं अस्वस्थता के महासमर में संघर्षरत रहकर असामयिक आकस्मिक निधन। निधन : 4 मार्च, 1992 |

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