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Bhaktikavya Aur Lokjeevan

by Shivkumar Mishra
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350725320
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 124
  • Original Price: INR 350.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 3rd Edition
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): General

सम्पूर्ण भक्तिकाव्य को मार्क्सवादी दृष्टि से इतनी समग्रता में विश्लेषित-विवेचित करने वाली हिन्दी की सम्भवतः यह पहली पुस्तक है। इसमें भक्तिकाव्य के जीवन्त और मृत तत्त्वों को अलगाया गया है और कहा गया है कि उसके जीवन्त तत्त्व हमारे आज के जीवन के लिए भी सार्थक और प्रेरक हैं। इसके विपरीत उसके रूढ़ तत्त्वों का इस्तेमाल और प्रचार अध्यापकों का वह तबका करता है जो प्रतिगामी और पुनरुत्थानवादी है। इसके विपरीत भक्तिकाव्य का एक पक्ष लोकवादी और प्रगतिशील है। इसकी चर्चा कम होती है या नहीं होती है। लेखक के ही शब्दों में, 'भक्तिकाव्य को मैंने ग्रहण किया है उस स्तर पर जिसकी या तो घोर भौतिकता में डूबे उसके भजनपूजनवादी प्रशंसक चर्चा नहीं करते या औपचारिकतावश चर्चा करते भी हैं तो वह उन्हें अपने ऊपर ही व्यंग्य मालूम देती है ।'

शिवकुमार मिश्र -जन्म : 2 फरवरी 1931, कानपुर (उ.प्र.) ।प्रारम्भिक शिक्षा कानपुर, दयानन्द कॉलेज, कानपुर से एम.ए.। पीएच.डी. तथा डी.लिट्. सागर विश्वविद्यालय, सागर, म.प्र. से ।सन् 1959 से सन् 1977 तक सागर विश्वविद्यालय में, तथा उसके उपरान्त 1991 ई. तक सरदार पटेल विश्वविद्यालय, वल्लभ विद्यानगर (गुजरात) में अध्यापन ।रचनाएँ : नया हिन्दी काव्य, प्रगतिवाद, मार्क्सवादी साहित्य-चिन्तन, यथार्थवाद, प्रेमचन्द : विरासत का सवाल, आचार्य शुक्ल और हिन्दी आलोचना की परम्परा, भक्ति आन्दोलन और भक्तिकाव्य, मार्क्सवाद देवमूर्तियाँ नहीं गढ़ता, आधुनिक कविता और युग-सन्दर्भ, इतिहास, साहित्य और संस्कृति सहित साहित्य-समीक्षा से सम्बन्धित 17 पुस्तकों का लेखन ।साहित्य-समीक्षा से सम्बन्धित आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी की चार पुस्तकों तथा ख्यात विदेशी लेखकों की चार पुस्तकों का सम्पादन-पुनःप्रस्तुति ।मार्क्सवादी साहित्य-चिन्तन पुस्तक पर सन् 1975 में 'सोवियत लैंड नेहरू एवार्ड' ।भारत सरकार की सांस्कृतिक आदान-प्रदान योजना के तहत 1991 ई. में 15 दिन की सोवियत यूनियन की सांस्कृतिक यात्रा ।

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