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Bharat Ka Veer Yoddha Maharana Pratap

by Sushil Kapoor
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789350485712
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 136
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): General

अपनी आन के पक्के महाराणा प्रताप को मेवाड़ का शेर कहा जाता है। हल्दीघाटी के युद्ध में वह मुगल सेना से हार गए और उन्हें जंगलों में अपने परिवार के साथ शरण लेनी पड़ी। वहाँ कई-कई दिन उन्होंने भूखे-प्यासे और घास-पात की रोटियाँ खाकर गुजारे।महाराणा प्रताप का जन्म सिसोदिया राजपूतों के वंश में हुआ। उनके पिता उदय सिंह स्वयं एक प्रबल योद्धा थे। उन्होंने कभी मुगलों के सामने घुटने नहीं टेके। युद्ध से बचने के लिए आस-पास के कई राजपूत राजाओं ने अपनी पुत्रियों के विवाह अकबर के साथ कर दिए, लेकिन उदय सिंह ने वैसा नहीं किया। महाराणा प्रताप ने भी अपने पिता की नीति का अनुसरण किया। मुगल बादशाह अकबर को यह बात बहुत खटकती थी। इसी का बदला लेने के लिए उसने मानसिंह और राजकुमार सलीम के नेतृत्व में सेना भेजी। हल्दीघाटी के मैदान में हुए युद्ध में महाराणा प्रताप के अंतिम सैनिक तक ने बलि दे दी। तब जाकर मुगल सेना बढ़त बना पाई।जंगल में भूख से बिलबिलाते बच्चों को महाराणा प्रताप कब तक देख पाते। आखिर उन्होंने अकबर को आत्मसमर्पण का खत लिखने का फैसला किया। लेकिन तभी देशभक्‍त भामा शाह मदद लेकर आ गया। आगे फिर संघर्ष जारी रखा।साहस, शौर्य, निडरता, राष्‍ट्रप्रेम और त्याग की प्रतिमूर्ति भारत के वीर योद्धा महाराणा प्रताप की प्रेरणाप्रद जीवनी।

सुशील कपूरहिंदी साहित्य में एम.ए. तथा अभिव्यंजनावाद पर शोध कार्य। कुछ समय तक कॉलेज में अध्यापन के बाद एक पत्रिका के उपसंपादक बने। एक समाचार एजेंसी में उपसंपादक, एक प्रकाशन संस्थान में प्रकाशन-प्रबंधक, एक समाचार मासिक में वरिष्‍ठ सहायक संपादक रहे तथा एक विज्ञापन एजेंसी में दो दशक तक वाइस प्रेसीडेंट के पद पर काम किया। इसके साथ-साथ रेडियो व विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के लिए लेख, अग्रलेख, आवरण कथाएँ, फीचर, नाटक आदि लिखे। विज्ञापन एजेंसियों के लिए कॉपीराइटिंग तथा लघु चित्रों के लिए पटकथाएँ आदि लिखीं। प्रकाशन संस्थानों के लिए लेखन, अनुवाद, संपादन आदि किया। संप्रति स्वतंत्र लेखन।

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