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Bharatiya Gyan-Parampara Ka Nairantarya

by Kapil Kapoor
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789347014628
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 136
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

आचार्यवर एक बात बड़ी केंद्रीयता से स्थापित करना चाहते है कि भारत वैभवशाली, शक्ति-संपन्न देश रहा है। आपसी अंतर्विरोधों एवं षड्यंत्रों ने हमें गुलामी की ओर धकेला है। पर हम शरीर से भले गुलाम रहे हों, मन-मस्तिष्क से कभी गुलाम नहीं रहे, इसलिए जिस जेएनयू में 1970 के दशक में जब मार्क्सवाद अपने चरम पर था, भारतीय विचारों को दकियानूसी एवं ओल्ड कहा जा रहा था, उसी जेएनयू में आचार्यवर ने अंग्रेजी साहित्य में पाणिनि, पतंजलि और भर्तृहरि के माध्यम से भारतीय व्याकरण परंपरा को पढ़ाने का सुदृढ़ निर्णय लिया।आज भी वह चल रहा है। आज जेएनयू में संस्कृत एवं प्राच्य विद्या अध्ययन संस्थान एवं वर्तमान में भारतीय ज्ञान-परंपरा का केंद्र खुलना इस तथ्य को प्रमाणित करता है कि ज्ञानात्मक संस्कृति का पाञ्चजन्य क्या है। महाभारत के युद्ध में पाञ्चजन्य शंख श्रीकृष्ण ने बजाया था।70 के दशक में वही पाञ्चजन्य जेएनयू से गूंज बनकर आज संपूर्ण भारत में भारतीय ज्ञान-परंपरा के माध्यम से ग्रहण किया जा रहा है तो उसमें लगभग 51 (1974 से 2025) वर्षों की अनवरत साधना का प्रतिफल ही है। भारत के कोने-कोने में दिए गए उनके व्याख्यान, संवाद और अनंत मानस परिवर्तन ने भारतीय ज्ञान-परंपरा को ज्ञानात्मक संस्कृति का पाञ्चजन्य बना दिया है।

पद्म भूषण प्रो. कपिल कपूरभारतीय ज्ञान-परंपरा तथा संस्कृति के अध्येता एवं प्रखर विद्वान् हैं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के उपकुलपति, प्रोफेसर एमेरिटस और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलाधिपति रहे। उनके निर्देशन में अब तक 41 पीएच.डी. एवं 36 शोध कार्य संपन्न हुए। वे भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला तथा इंडिया पॉलिसी फाउंडेशन के अध्यक्ष रहे।इंडियन पोएटिक्स, साहित्य अकादमी (यूनेस्को), इनसाइक्लोपीडिया ऑफ हिंदुइज्म (ग्यारह भाग), अभिनवगुप्त पांडुलिपि और आइरिश इंडिया एंथ्रोपोलॉजी, इंडियन नॉलेज ट्रेडिशन (दो भाग), लिटरेरी थ्योरी : इंडियन कॉन्सेप्चुअल फ्रेमवर्क, 1998, कैनोनिकल टेक्स्ट ऑफ इंग्लिश लिटरेसी क्रिटिसिज्म विद सिलेक्शन फ्रॉम क्लासिकल पोएटीशंस (सह-संपादक रंगा कपूर), इंग्लिश इन इंडिया का संपादन किया है।प्रमुख मौलिक पुस्तकें - भारतीय परंपरा में रति भक्ति, डायमेंशन ऑफ पाणिनि ग्रामर 2005, टेक्स्ट एंड इंटरप्रिटेशन, लिटरेरी थ्योरी : इंडियन कॉन्सेप्चुअल फ्रेमवर्क, लैंग्वेज, लिंग्विस्टिक्स और लिटरेचर-इंडियन परसेप्टिव हैं। 2008 में यूनाइटेड किंगडम के उच्च सदन में लोकतंत्र और राजनीति पर बहुचर्चित व्याख्यान दिया। 1000 से अधिक व्याख्यान राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में दिए हैं। वर्तमान में भारत सरकार की उच्च स्तरीय समिति के सदस्य हैं।

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