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Buniyaad

by Manohar Shyam Joshi
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789352291182
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 304
  • Original Price: INR 150.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 400 grams
  • BISAC Subject(s): General

दूरदर्शन-धारावाहिक के रूप में 'बुनियाद' को देश के लाखों-करोड़ों दर्शकों ने देखा और सराहा। उसकी इस सफलता को लेकर मेरी ख़ुशी स्वाभाविक है, ख़ासकर इसलिए भी कि इसके माध्यम से मैंने जो कहा, लोगों ने उसे पूरे मन से सुना-समझा।लेकिन 'बुनियाद' पर काम करते हुए जिन मित्रों का सहयोग मिलता रहा, वह न मिलता तो ऐसी सफलता सन्दिग्ध थी। ख़ासतौर से लेखन-कार्य में सलाहकार रहीं सुप्रसिद्ध कथाकार कृष्णा सोबती तथा शोध-कार्य के लिए डॉ. पुष्पेश पन्त के प्रति मैं हृदय से आभारी हूँ। दृश्यालेख को पुस्तक-रूप देने में श्री भूपेन्द्र अबोध ने जो कार्य किया उसके लिए मैं उनका भी आभारी हूँ। - मनोहर श्याम जोशी

मनोहर श्याम जोशी -9 अगस्त, 1933 को अजमेर में जन्मे, लखनऊ विश्वविद्यालय के विज्ञान स्नातक मनोहर श्याम जोशी ‘कल के वैज्ञानिक’ की उपाधि पाने के बावजूद रोज़ी-रोटी की ख़ातिर छात्र जीवन से ही लेखक और पत्रकार बन गये। अमृतलाल नागर और अज्ञेय इन दो आचार्यों का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त हुआ। स्कूल मास्टरी, क्लर्की और बेरोज़गारी के अनुभव बटोरने के बाद अपने 21वें वर्ष से वह पूरी तरह मसिजीवी बन गये। प्रेस, रेडियो, टी.वी., वृत्तचित्र, फ़िल्म, विज्ञापन-सम्प्रेषण का ऐसा कोई माध्यम नहीं जिसके लिए उन्होंने सफलताषूर्वक लेखन-कार्य न किया हो। खेल-कूद से लेकर दर्शनशास्त्र तक ऐसा कोई विषय नहीं जिस पर उन्होंने क़लम न उठाई हो। आलसीपन और आत्मसंशय उन्हें रचनाएँ पूरी कर डालने और छपवाने से हमेशा रोकता चला आया है। पहली कहानी तब छपी थी जब वह अठारह वर्ष के थे लेकिन पहली बड़ी साहित्यिक कृति प्रकाशित करवाई जब सैंतालीस वर्ष के होने आये। केन्द्रीय सूचना सेवा और टाइम्स ऑफ़ इंडिया समूह से होते हुए सन् 1967 में हिन्दुस्तान टाइम्स प्रकाशन में साप्ताहिक हिन्दुस्तान के सम्पादक बने और वहीं एक अंग्रेज़ी साप्ताहिक का भी सम्पादन किया। टेलीविज़न धारावाहिक ‘हम लोग’ लिखने के लिए सन् 1984 में सम्पादक की कुर्सी छोड़ दी और तब से स्वतन्त्र लेखन करते रहे। निधन: 30 मार्च 2006।

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