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Digital Kanoonon Se Samriddha Bharat "डिजिटल कानूनों से समृद्ध भारत" Book In Hindi

by Virag Gupta
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789355216366
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 184
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

भारत में एक अरब आबादी मोबाइल और इंटरनेट से जुड़ी है। आटे से सस्ता डाटा होने की वजह से बच्चे, बूढ़े और जवान—सभी दिन भर सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। समाज के सभी वर्गों में इंटरनेट, सोशल मीडिया और ऑनलाइन पेमेंट का विस्तार हो गया है, लेकिन उस अनुपात में डिजिटल साक्षरता नहीं बढ़ने की वजह से भारत साइबर ठगों की सबसे बड़ी मंडी बन गया है।देश में परंपरागत कारोबारियों पर अंग्रेजों के जमाने के हजारों जटिल कानूनों का बोझ लदा हुआ है, लेकिन डिजिटल इंडिया में वर्चस्व बना रही विदेशी कंपनियाँ भारतीय कानून और टैक्स के दायरे से बाहर हैं।डिजिटल कंपनियों ने मुफ्त की अनेक सेवाओं के प्रलोभन से भारत के 140 करोड़ लोगों के डेटा को लूट लिया है। ब्रिटेन और फ्रांस ने 18वीं सदी के भारत में सैन्य बल से जो औपनिवेशिक साम्राज्य स्थापित किया था, 21वीं सदी में अमेरिका और चीन जैसे देश उसे इंटरनेट और टेक्नोलॉजी के दम पर हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।इंटरनेट कंपनियों पर सभी कानून लागू होने के साथ पूरे टैक्स की वसूली हो तो युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के साथ पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाले समृद्ध भारत का सपना साकार हो सकता है।

विराग गुप्ता सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्त तथा संवैधानिक और साइबर मामलों के जानकार हैं। उन्होंने टेलीकॉम, रियल एस्टेट, फूड सेफ्टी, माइनिंग और टैक्स जैसे गंभीर कानूनी विषयों पर पुस्तक लेखन के साथ बच्चों के लिए सरल भाषा में महापुरुषों की जीवनियाँ भी लिखी हैं। समसामयिक विषयों पर उनके कॉलम देश के प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में नियमित प्रकाशित होते हैं। उनके लेखों का विषय, चयन की विविधता, शोधपरक शैली और लोकप्रियता को देखते हुए गुजराती, मराठी, पंजाबी और उर्दू भाषाओं में उनका अनुवाद और नियमित प्रकाशन होता है। वे साइबर, संविधान और समसामयिक कानूनी मामलों में टेलीविजन डिसकसन के सुपरिचित और विख्यात विभूति हैं। अनेक पुस्तकों और विधि लेखन में योगदान को देखते हुए पिछले आठ साल से भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा ‘संविधान दिवस’ के वार्षिक समारोह के अवसर पर उन्हें सम्मानित किया जा रहा है।

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