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Dil Se Jo Baat Nikli Ghazal Ho Gayee

by Kalim Ajiz
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789350726105
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 170
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): General

कलीम आजिज उर्दू साहित्य के आधुनिक युग के प्रथम कवि हैं, जिन्हें उर्दू के एक बड़े कवि मीर का अन्दाज नसीब हुआ है। उनकी शायरी का अपना एक तेवर है। उनके अन्दर हमेशा मीर की तलाश की जाती रही है क्योंकि उनकी ग़ज़लों के तेवर न केवल मीर की बेहतरीन ग़जलों की याद दिलाते हैं, बल्कि उस सोचो गुदाज से भी अवगत कराते हैं जो मीर का ख़ास हिस्सा है। उनकी शायरी को आमतौर पर तीन दीर में विभाजित किया जा सकता है- (i) जख्मी होने का दीर (ii) जख्म देने वालों की पहचान और (iii) जख्म देने वाला एक व्यक्तित्व में सिमट आते हैं और फिर वही व्यक्तित्व तन्हा उनकी गजलों का महबूब बन जाता है। उस व्यक्तित्व में अलामतों की एक पूरी दुनिया समा गयी है।कलीम आजिज की ग़जलों की जमीन तेलहाड़ा की उस मिट्टी से तैयार हुई है, जिसमें दूसरे लोगों के अलावा कलीम आजिज़ की माँ, बहन और परिवार के कई सदस्यों का लहू मिला हुआ है। उन्होंने वास्तव में खून में उँगलियाँ डुबोकर अपनी ग़ज़लें लिखी हैं। कलीम आजिज़ का दुख और ग्रम उनकी अपनी विशेष परिस्थिति का फल है। यही उनकी शायरी की एक ऐसी शैली है जो उनकी पहचान बनाती है।"कोई दीवाना कहता है कोई शाहर कहता है, अपनी-अपनी बोल रहे हैं हमको ये पहचाने लोग'

कलीम आजिज़असली नाम : कलीम अहमदकुलमी नाम : कलीम आजिज़जन्म : 11 अक्तूबर 1924, तेलहाड़ा (जिला पटना)पठन-पाठन : पटना विश्वविद्यालय, पटना। 1964-65 में पटना कालेज में लेक्चरर हुए और 1986 में सेवानिवृत्त हुए।सम्प्रति : अध्यक्ष, उर्दू मुशावरती कमिटी, बिहार सरकार।उपाधियाँ : पद्मश्री 1989, भारत सरकार इम्तियाज़े मीर, कुल हिंद मीर अकादमी, लखनऊ; अल्लामा, मशीगन उर्दू सोसाइटी, अमेरिका; अल्लामा, तिलसा लिटरेरी सोसाइटी, अमेरिका, प्रशंसा पत्र, मल्टी कल्चरल कौंसिल आफ ग्रेटर टोरंटो प्रशंसा पत्र, उर्दू कौंसिल आफ कनाडा; मौलाना मजहरुल हक्क पुरस्कार, राज्य भाषा, बिहार सरकार; बिहार उर्दू अकादमी पुरस्कार ।प्रकाशित रचनाएँ : मजलिसे अदब (आलोचना); वो जो शाइरी का सबब हुआ, जब फ़सले बहाराँ आयी थी (ग़ज़ल संग्रह); फिर ऐसा नजारा नहीं होगा, कूचा - ए जानाँ जानाँ (ग़ज़लों एवं नज़्मों का संग्रह); जहाँ खुशबू ही खुशबू थी, अभी सुन लो मुझसे (आत्मकथा): मेरी जबान मेरा क़लम (लेखों का संग्रह, दो भाग); दफ़्तरे गुम गश्ता (शोध); दीवाने दो, पहलू न दुखेगा (पत्रों का संग्रह); एक देश एक बिदेसी (यात्रा-वृत्तान्त, अमेरिका); यहाँ से काबा -काबा से मदीना (यात्रा-वृत्तान्त, हज) ।

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