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Dwarka Ka Suryasta

by Dinkar Joshi
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788193295656
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 108
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 175 grams
  • BISAC Subject(s): Hinduism / General

‘‘दाऊ!’’ बलराम के पास जाकर कृष्ण ने तनिक झुककर उनसे पूछा, ‘‘किस सोच में डूबे हैं आप?’’‘‘कृष्ण! प्रभासक्षेत्र के आयोजन एवं गांधारी के शाप की समयावधि के बीच...’’‘‘बडे़ भैया!’’ कृष्ण जैसे चौंक उठे, ‘‘आप...आप...यह क्या कह रहे हैं?’‘‘माधव!’’ बलराम ने होंठ फड़फड़ाए, ‘‘महर्षि कश्यप के शाप को हमें विस्मृत नहीं करना चाहिए।’’‘‘वह मैं जानता हूँ, संकर्षण! उसकी स्मृति हमें ऊर्ध्वगामी बनाए, ऐसी प्रार्थना हम करें।’’‘‘उस प्रार्थना के लिए ही मैं इस समुद्र-तट पर योग-समाधि लेना चाहता हूँ। योग-समाधि पूर्व के इस पल में मैं तुमसे एक क्षया-याचना करना चाहता हूँ, भाई।’’‘‘यह आप क्या कह रहे हैं, दाऊ? आप तो मेरे ज्येष्ठ भ्राता...’’बलराम ने कहा, ‘‘मद्य-निषेध तो एक निमित्त था, परंतु वृष्णि वंशियों के लिए उनका सनातन गौरव अखंड रखने के लिए यह निमित्त अनिवार्य था। फिर भी हम उसे सँभाल न सके। अब इस असफलता को स्वीकार करने में कोई लज्जा या संकोच नहीं होना चाहिए। यादवों को यह गौरव प्राप्त होता रहे, इसके लिए तुमने बहुत कुछ किया; परंतु यादव उस गौरव से वंचित रहे, उस अपयश को मुझे स्वीकार करना चाहिए। समग्र यादव वंश को तो ठीक, परंतु कृष्ण...’’ बलराम का कंठ रुँध गया, ‘‘भाई, मैंने तुमसे भी छल...’’‘‘ऐसा मत कहिए, बडे़ भैया!’’ बलराम के एकदम निकट बैठते हुए कृष्ण ने उनके हाथ पकड़ लिए, ‘‘हम तो निमित्त मात्र हैं। कर्मों का निर्धारण तो भवितव्य कर चुका होता है।’’

जन्म : 30 जून, 1937 को भावनगर, गुजरात में।डॉ. दिनकर जोशी का रचना संसार अत्यंत व्यापक है। 45 उपन्यास, 12 कहानी-संग्रह, 13 संपादित पुस्तकें, महाभारत व रामायण विषयक 9 अध्ययन ग्रंथ और लेख, प्रसंग चित्र, अन्य अनूदित पुस्तकों सहित अब तक उनकी कुल 154 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्हें गुजरात राज्य सरकार के 5 पुरस्कार, गुजराती साहित्य परिषद् का उमा-स्नेहरश्मि पारितोषिक तथा गुजरात थियोसोफिकल सोसाइटी का मैडम ब्लेवेट्स्की अवार्ड प्रदान किए गए हैं। राजस्थान स्थित जे.जे.टी. यूनिवर्सिटी द्वारा डी.लिट्. की मानद उपाधि से सम्मानित।उनके ग्रंथों में जीवन कथनात्मक उपन्यासों का विशेष योगदान है। गांधीजी के ज्येष्ठ पुत्र हरिलाल, गुरुदेव टैगोर, तथागत बुद्ध, काउंट लेव टॉलस्टॉय और सरदार पटेल की जीवनी पर आधारित आपके उपन्यास एवं रामायण-महाभारत पर केंद्रित कई पुस्तकें हिंदी, मराठी तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड, ओडि़या, बांग्ला, अंग्रेजी और जर्मन में अनूदित हो चुकी हैं।देश की विभिन्न 6 भाषाओं में एक साथ 15 पुस्तकें प्रकाशित होने की घटना को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में स्थान मिला। उन्होंने संपूर्ण महाभारत के गुजराती अनुवाद के 20 ग्रंथों के संपुट का संपादन किया है।संप्रति : गुजराती साहित्य के सत्त्वशील ग्रंथों को अन्य प्रादेशिक भाषाओं में प्रकाशित करने में संलग्न।

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