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Faisla

by Pardeshiram Verma
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350008430
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 152
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): General

फैसला - छत्तीसगढ़ अंचल के जीवन राग और अन्तःसंघर्ष को प्रतिबिम्बित करती परदेशीराम की हिन्दी कहानियाँ विषय और अनोखे कथाप्रसंगों के साथ ही सरल प्रस्तुति के कारण चर्चित हुईं। सतत विस्तार की ओर अग्रसर लाल गलियारे के कारण खौफ़जदा आदिवासियों की कहानियाँ इस संकलन को नया आयाम देती हैं।साथ ही खण्डित होती आस्था और टूट रहे सामाजिक सम्बन्धों पर केन्द्रित इस संग्रह की कहानियाँ इस अंचल की सीमाओं का अतिक्रमण भी करती हैं। विकास की ओर अग्रसर देश और प्रदेश के लोग निजता और सुकून की क़ीमत पर मिल रही उपलब्धियों को अपनी हार और चन्द मुट्ठी भर विस्तारवादी लोगों की जीत की तरह स्वीकारने हेतु विवश हैं। आक्रामक एवं विस्तारवादी कारखानेदारों की संवेदनहीन उद्योग दृष्टि से संचालित योजनाओं ने गाँवों के आसमान को धुएँ और खेतों की धूल से ढँक सा दिया है। फिर भी मर-मर के जीते हुए और इस घेरेबन्दी से निकलकर साँस लेने में क़ामयाब ग्रामीणजन नयी पीढ़ी के लिए गाँवों को गाँव की तरह बचा लेने हेतु इन कहानियों में संकल्पित दिखते हैं। इस संग्रह की कहानियाँ समकालीन परिदृश्य को भयावह सर्पकाल के रूप में चित्रित करती हैं। ये कहानियाँ बताती हैं कि धर्म, जाति और स्थानीयता के नकली मसलों में उलझाकर मनुष्यता के पारम्परिक स्वरूप को विरूपित करने वाली ताकतें अब और अधिक प्रवीण, साधन सम्पन्न और मायावी हो गयी हैं। विलक्षण भाषा कौशल और दुर्लभ कथ्य के साथ ही प्रस्तुति में सादगी और सधाव संग्रह की कहानियों की विशेषता है।

परदेशीराम वर्मा - - 18 जुलाई, 1947, छत्तीसगढ़ के गाँव लिमतरा में। -पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से 2003 में मानद् डी.लिट्.।- आसाम राइफ़ल्स के पूर्व आपरेटर रेडियो एण्ड लाइन।-भिलाई इस्पात संयन्त्र की चौथी नौकरी से 2002 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति।अब तक प्रकाशित : चार कथा संग्रह (हिन्दी); एक कथा संग्रह (छत्तीसगढ़ी); दो उपन्यास (हिन्दी); एक उपन्यास (छत्तीसगढ़ी)। -जीवनी 'आरूग फूल' को म.प्र. शासन के संस्कृतिविभाग का सप्रे पुरस्कार। -डॉ. खूबचन्द बघेल की जीवनी।-संस्मरणों की 9 पुस्तकें तथा एक नाटक की किताब। - छत्तीसगढ़ पर केन्द्रित पुस्तक 'मेरा छत्तीसगढ़' तथा छत्तीसगढ़ के चर्चित व्यक्तित्वों पर 'सितारों का छत्तीसगढ़'।-शोध - छत्तीसगढ़ में जातीय सौमनस्य और कबीर छ.ग. राज्य हिन्दी ग्रन्थ अकादमी द्वारा शीघ्र प्रकाश्य। -रायपुर दूरदर्शन के लिए दो सीरियल तथा 10 टेलीफ़िल्मों का लेखन। -हिन्दी की पाँच कहानियाँ तथा छत्तीसगढ़ी की एक कहानी पुरस्कृत।- छत्तीसगढ़ी एवं हिन्दी में लगातार उल्लेखनीय लेखन के अतिरिक्त लोकमंचीय प्रस्तुतियों तथा मंचीय साधना के लिए सम्मान हेतु गठित संस्था अगासदिया द्वारा प्रकाशित पत्रिका का सम्पादन।

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