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Fir Bhi Zindagi Khoobsurat Hai

by N Raghuraman
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789351863205
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 160
  • Original Price: INR 125.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): Personal Growth / Self-Esteem

जीवन कभी हमारी सोच के हिसाब से नहीं चलता और इसमें समुद्र की तरह उतार-चढ़ाव होते रहते हैं। यह तूफान का सामना करने और हमारे द्वारा अपनाए जानेवाले जीवन-कौशल का नाम है। तीन महान् विभूतियों ने जीवन के बारे में समान बात कही है। नॉर्मन विन्सेंट पीएल ने कहा है, ‘खाली जेब से किसी का काम नहीं चलता। केवल खाली सिर और खाली हृदय ही यह काम कर सकते हैं।’ और बाद में जिग जिगलर ने सार्थक जीवन के बारे में कहा, ‘आपकी प्रतिष्ठा आपके दृष्टिकोण से तय होती है, न कि आपकी अभिरुचि से।’ और अंत में कार्ल जन ने कहा,‘मैं वो नहीं हूँ, जो मेरे साथ हुआ है। मैं वही हूँ, जो मैंने बनना चाहा था।’जीवन में आप समस्याओं से निपटने में तभी अधिक सक्षम होते हैं, जब आपने खुद उनका अनुभव किया हो या उनके बारे में पढ़ा हो। यहाँ ऐसी ही कहानियों का संग्रह प्रस्तुत है, जिसमें बिना यह जाने कि वे विभूतियाँ कौन हैं और किसने क्या कहा था, फिर भी सैकड़ों लोगों ने जीवन को उनकी सोच के हिसाब से जीना पसंद किया और भाग्य में क्या लिखा है, इसकी परवाह नहीं की।इस पुस्तक के अंत में आपको ऐसा अहसास होगा कि मेरी समस्याएँ कुछ भी नहीं हैं और मैं उनसे आसानी से निपट सकता हूँ। अगर आपको भी यही अहसास होता है तो इस पुस्तक का उद्देश्य पूरा हो जाता है।

मुंबई विश्‍वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट और आई.आई.टी. (सोम) मुंबई के पूर्व छात्र श्री एन. रघुरामन मँजे हुए पत्रकार हैं। 30 वर्ष से अधिक के अपने पत्रकारिता के कॅरियर में वे ‘इंडियन एक्सप्रेस’, ‘डीएनए’ और ‘दैनिक भास्कर’ जैसे राष्‍ट्रीय दैनिकों में संपादक के रूप में काम कर चुके हैं। उनकी निपुण लेखनी से शायद ही कोई विषय बचा होगा, अपराध से लेकर राजनीति और व्यापार-विकास से लेकर सफल उद्यमिता तक सभी विषयों पर उन्होंने सफलतापूर्वक लिखा है। ‘दैनिक भास्कर’ के सभी संस्करणों में प्रकाशित होनेवाला उनका दैनिक स्तंभ ‘मैनेजमेंट फंडा’ देश भर में लोकप्रिय है और तीनों भाषाओं—मराठी, गुजराती व हिंदी—में प्रतिदिन करीब तीन करोड़ पाठकों द्वारा पढ़ा जाता है। इस स्तंभ की सफलता का कारण इसमें असाधारण कार्य करनेवाले साधारण लोगों की कहानियों का हवाला देते हुए जीवन की सादगी का चित्रण किया जाता है।श्री रघुरामन ओजस्वी, प्रेरक और प्रभावी वक्‍ता भी हैं; बहुत सी परिचर्चाओं और परिसंवादों के कुशल संचालक हैं। मानसिक शक्‍ति का पूरा इस्तेमाल करने तथा व्यक्‍ति को अपनी क्षमता के अधिकतम इस्तेमाल करने के उनके स्फूर्तिदायक तरीके की बहुत सराहना होती है।

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