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Ganga: Sanskriti Ka Sanatan Pravah

by Vidyaniwas Mishra
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789355184634
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 160
  • Original Price: INR 295.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): General

गंगा' शब्द मात्र सुन कर मन में दिव्य शुचिता और पावनता का भाव उमड़ने लगता है। वे देव लोक और पृथ्वी दोनों जगह सबको आप्यायित करती हैं। गंगा की महिमा का गान भारत के इतिहास, पुराण और साहित्य में ही नहीं, बल्कि लोक मानस में भी निरन्तर गूँजता रहा है। जहाँ गंगा के तट पर सदियों से जाने कितने ध्यानी. ज्ञानी, सन्त और महात्मा साधना करते आये हैं. वहीं गंगा की तरंग ने कवियों की कल्पना को भी तरंगायित कर काव्य सृजन को जन्म दिया है। निर्मल गंगा-जल अपनी पवित्रता और औषधीय गुण से युक्त होने के कारण तन-मन के स्वास्थ्य संवर्धन का साधक भी है। अतः गंगा असंख्य भारतीयों के लिए माँ है और भारतीय मन अपनी माता का सान्निध्य पाने के लिए मचलता रहता है। हममें से बहुतों के लिए गंगा स्नान सदैव एक तृप्तिदायी अनुभव होता है। गांवों में 'नहान' जीवन का एक दुर्लभ अवसर माना जाता है, जब अमीरी, गरीबी, ऊँची और नीची जाति आदि के सारे भेदों को धता बताते हुए सब के सब गंगा में डुबकी लगा कर अपने को धन्य मानते हैं। इसका एक विशेष रूप 'कुम्भ' पर्व के विराट आयोजन के अवसर पर दिखता है, जो बारह वर्ष के अन्तराल पर सदियों से होता आ रहा है। कुम्भ के पुण्य अवसर पर प्रयाग में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर स्नान के अवसर की कामना लिए लोग सालोंसाल तैयारी करते रहते हैं। साथ ही उपयुक्त मुहूर्त में हरिद्वार, नासिक और उज्जैन की धर्म नगरियों में भी कुम्भ का स्नान सम्पन्न होता है, जहाँ लोग जुटते हैं। कुम्भ का पर्व धार्मिक उत्सव होने के साथ ही देश की भावनात्मक और सांस्कृतिक एकता का भी एक प्रमुख आधार है।

दयानिधि मिश्रजन्म : 01 अक्टूबर, 1948, गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय सहित विभिन्न महाविद्यालयों में आठ वर्षों का अध्यापन-अनुभव। भारतीय पुलिस सेवा से अवकाश प्राप्त । सचिव, विद्याश्री न्यास एवं अज्ञेय भारतीय साहित्य संस्थान न्यास समिति । अध्यक्ष, श्री भारत धर्म महामण्डल। न्यासी, वेणी माधव ट्रस्ट । आचार्य विद्यानिवास मिश्र की स्मृति में स्थापित विद्याश्री न्यास के तत्त्वावधान में राष्ट्रीय अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, व्याख्यानों, सम्मान समारोहों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का नियमित आयोजन। विद्यानिवास मिश्र स्मृति ग्रन्थमाला के अन्तर्गत अब तक 10 पुस्तकों के अतिरिक्त 'भूमध्य सागर से गंगा तट तक', 'क्या पूरब क्या पश्चिम', 'अज्ञेय : मौन की अभिव्यंजना', ‘धर्म की अवधारणा’ एवं 'विद्यानिवास मिश्र संचयिता' का सम्पादन ।सम्मान : सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक (1994), हिन्दुस्तान समाचार का भाषा सम्मान (2014), सेवक स्मृति साहित्य श्री सम्मान (2016), वासुदेव द्विवेदी सम्मान (2017)।सम्प्रति : विद्यानिवास मिश्र रचनावली (21 खण्डों में) का सम्पादन । वाराणसी में निवास ।T.: 09415776312

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