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Gujarat Ki Lokkathayen

by Raghavji Madhad
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789355210296
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 168
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

गुजरात वैविध्य सांस्कृतिक विरासत रखनेवाला विकासशील राज्य है। यहाँ समुद्र, रेगिस्तान, पर्वत और जंगल हैं, जो शायद ही किसी राज्य में एक साथ देखने को मिलते हैं। इन प्राकृतिक, भौगोलिक और सामाजिकता का प्रभाव जनजीवन पर पड़ता रहता है, जिसके आधार पर कला, संस्कृति और साहित्य विकसित होता रहता है।गुजरात के विविध प्रदेशों की सांस्कृतिक और मानव-महिमा को उजागर करनेवाली इन कथाओं में मानवीय गुणों के साथ भाषा व विषयों की विविधता वाली कथाएँ हैं, जिसमें लेखन की विभिन्न शैलियों एवं कथा-कौशल का अनुभव प्राप्त होगा।ये काल के प्रवाह में बह जाने के बदले लोकहृदय को आर्द्र करती रहनेवाली कथाएँ हैं। इतिहास के जर्जरित पन्नों से लगी रजकणिकाएँ हैं। शीलवंत, भटके हुए, भूले हुए, पराक्रमशील, हँसमुख और स्नेहवाले नर-नारियों के जीवन की मधुरता से महकते पात्र इन कथाओं में आलस्य छोड़कर उठ खड़े हुए हैं, जिनमें प्रकृति-प्रेम के साथ प्राणी-प्रेम भी आ जाता है।गुजरात के समृद्ध लोकजीवन की बानगी देती ये लोककथाएँ पाठकों को वहाँ की संस्कृति, परंपराओं और मान्यताओं से परिचित करवाएँगी और उनका ज्ञानवर्धन-मनोरंजन भी करेंगी।

डॉ. राघवजी माधड गुजराती साहित्य और शिक्षा-जगत् में लोकप्रिय साहित्य के शिखर पर विराजमान साहित्यकार हैं। जो उपन्यास, कहानी, निबंध, नाटक और विशेषतः लोकसाहित्य आदि स्वरूपों में अपनी कलम के बल पर शिखर पर पहुँचे हैं।सौराष्ट्र के एक छोटे से गाँव की मिट्टी से अपना जीवन और कलम की यात्रा का आरंभ करनेवाले यह सर्जक राज्य सरकार के त्र.ष्ट.श्व.क्त्र.ञ्ज. के अधिकारी के पद तक अपनी मेहनत व निष्ठा से पहुँचे हैं। इनके उपन्यास, कहानी और जन-कहानियों में मानवीय सच्चाई, संवेदनशीलता, सत्-असत्, पारंपरिक मूल्य और नए युग के नए आयाम अपने आप उभरकर आते हैं।मूल्य शिक्षा में पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त करनेवाले डॉ. माधड की गुजरात सरकार को टैक्स्ट बुक बोर्ड के अभ्यासक्रम निर्धारण से सतत् जुड़े हैं।गुजराती लोकजीवन की कहानियों को वे विभिन्न अखबारों के अपने कॉलमों में जीवंत करते रहे हैं।स्वभाव से एकदम सरल, निश्छल और विनम्र डॉ. माधड के अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। उन्होंने रेडियो, टी.वी. और फिल्मों को भी अपनी कलम से समृद्ध किया है।

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