Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Hazar Sher Firaq Ke

by Firaq Gorakhpuri
Save 35% Save 35%
Current price ₹195.00
Original price ₹300.00
Original price ₹300.00
Original price ₹300.00
(-35%)
₹195.00
Current price ₹195.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788181437846
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 126
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

फ़िराक़ गोरखपुरी उर्दू के ऐसे अज़ीम तरीन शायर थे जिन्होंने उर्दू ग़ज़ल के क्लासिक मिज़ाज से बिना कोई हस्तक्षेप किये, नये लब-लहजे की शायरी की। उन्होंने उर्दू ग़ज़ल को उच्च संस्कारित मूल्यों से परिपक्व किया और उसे विशिष्ट मुकाम तक पहुँचाया ।फ़िराक़ की सैकड़ों ग़ज़ल में से एक हज़ार शे'र का यह संकलन, अपने आपमें एक संसार की रचना है । इस संकलन में हर रुचि, विषय और स्तर के शे'र शामिल हैं। एक तरह से एक हज़ार शे'र की यह किताब, आकाश में झिलमिलाते सितारों की तरह है और किसी ग्लैक्सी की तरह भी ! प्रत्येक शे'र की अपनी सृष्टि है और अपनी ज़िन्दगी भी...एक ऐसी ज़िन्दगी जो कभी ख़त्म नहीं होती । क्योंकि उत्कृष्ट शे'र हमेशा अमर रहते हैं ।इसी किताब से एक शे'र-बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं तुझे ऐ ज़िन्दगी, हम दूर से यह भान लेते हैं

फ़िराक़ गोरखपुरी (1896 - 1982)1896 : अगस्त 28, गोरखपुर में जन्म।1913 : स्कूल लीविंग परीक्षा में उत्तीर्ण।1915 : एफ़.ए.। म्योर सेंट्रल कालेज, इलाहाबाद से।1917 : जून 18 : पिता मुंशी गोरखप्रसाद 'इबरत' का देहान्त। बी.ए. में प्रान्त भर में चौथा स्थान प्राप्त। प्रान्तीय सिविल सर्विस में डिप्टी कलक्ट्री के पद पर निर्वाचित।1918 : स्वराज आन्दोलन शुरू होते ही सरकारी पदों का त्याग।1920 : साहित्यिक जीवन का प्रारम्भ।1920 : दिसम्बर 6 : प्रिंस ऑफ़ वेल्स के आगमन के विरुद्ध आन्दोलन में पंडित जवाहरलाल नेहरू के प्रस्ताव पर प्रान्तीय कांग्रेस के डिक्टेटर निर्वाचित। फिर स्वयं रफ़ी अहमद क़िदवई के पक्ष में 'डिक्टेटरशिप' का त्याग। दिसम्बर 13 : डेढ़ बरस की क़ैद। जेल में विशिष्ट साहित्यिक रचनाएँ।1922 : अखिल भारतीय कांग्रेस के 1927 तक 'अंडर सेक्रेट्री'।1927 : क्रिश्चियन कालेज, लखनऊ में अध्यापक नियुक्त।1928 : बी.एन.एस.डी. कालेज, कानपुर में अंग्रेजी और उर्दू के प्राध्यापक नियुक्त।1930 : आगरा विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी एम.ए. में प्रथम स्थान प्राप्त बिना प्रार्थनापत्र दिये ही अपने मातृ-विद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्राध्यापक नियुक्त। इसी बीच उर्दू साहित्य में सर्वश्रेष्ठ स्थान की प्राप्ति।1959 विश्वविद्यालय से अवकाश।1961 : उर्दू काव्य संकलन 'गुले-नग्मा' साहित्य अकादेमी एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पुरस्कृत।1965 : नेहरू-पुरस्कार प्राप्त।1970 : साहित्य अकादेमी के 5वें सदस्य (फ़ेलो) निर्वाचित। 'गुले-नग्मा' पर भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार।1981 : ग़ालिब अकादेमी अवार्ड।1982 : नयी दिल्ली में निधन।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us