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Jack London Ki Lokpriya Kahaniyan

by Jack London
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789355212146
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 176
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): General

एक बार फिर उसने चारों ओर दृष्टि घुमाकर देखा, यह बहुत हर्षदायक नजारा नहीं था। चारों ओर एक धुँधली आकाशरेखा था। सारे पहाड़ नीचे थे। कहीं पर भी कोई पेड़, झाड़ी या घास नहीं दिख रही थी। यहाँ तो केवल विशाल और भयंकर अकेलापन था, जिससे उसके अंदर एक भय की लहर सी दौड़ गई थी।वह दुधिया पानी में थोड़ा झुक गया, जैसे कि वह विशाल जलधारा उसके ऊपर ही चढ़ी आ रही थी और उसको निर्दयता से कुचले दे रही थी, उसकी सुषुप्ति से। वह बहुत जोर-जोर से हिलने लगा, जैसे उसको दौरा आ गया हो और उसकी बंदूक हाथ से छूटकर गिर पड़ी। वह अपने भय से लड़ा, अपने को सीधा किया तथा पानी में अपनी बंदूक खोजने लगा और फिर उसे पुनः वापस पा लिया। उसने अपने बैकपैक को बाएँ कंधे की ओर कर लिया, जिससे उसके घायल टखने को कुछ आराम मिल सके। फिर वह धीरे-धीरे दर्द से सिकुड़ते हुए आगे तट की ओर बढ़ने लगा।—इसी पुस्तक सेजैक लंडन ने बहुत सारे साहसिक अभियान किए, जिससे नदी, पहाड़, जंगल और जंगल के जीवों ने उनकी कहानियों में प्रमुखता से स्थान बना लिया। उनकी ये कहानियाँ साहस और रोमांच से भरपूर हैं, जो पाठकों को रोमांचित कर देती हैं।

जैक लंडनजन्म : 12 जनवरी, 1876 को सैन फ्रांसिस्को (कैलीफोर्निया) में।शिक्षा : प्रारंभ में आठवें स्तर तक ही विद्यालय जा पाए। पढ़ने की उत्कट लालसा की पूर्ति उन्होंने ऑकलैंड पब्लिक पुस्तकालय में जाकर की और बाद में कैलीफोर्निया के पहले राजकवि के रूप में प्रसिद्ध हुए। उन्होंने एक हजार शब्द प्रतिदिन लिखने के कठोर नियम का पालन किया और अठारह वर्षों तक निरंतर लेखन करते हुए प्रभूत मात्रा में उच्चकोटि का साहित्य सृजित किया।रचना-संसार : बहुचर्चित पुस्तकों में ‘कॉल ऑफ दि वाइल्ड’, ‘दि आयरन हील’, ‘व्हाइट फैंग’, ‘दि सी वुल्फ’ (जिसका मूल शीर्षक था ‘मर्सी ऑफ दि सी’), ‘दि पीपल ऑफ दि अबिस’, ‘जॉन बर्लेकार्न’, ‘मार्टिन ईडेन’ और ‘दि स्टर रोवर’। उनकी ‘टु बिल्ड अ फायर’ को युगांतरकारी रचना माना गया था। उनका साहित्य दर्जनों भाषाओं में अनूदित हुआ।

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