Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Karobare Tamanna

by Rahi Masoom Raza , Dr. M. Firoz Khan , Dr. Shagufta Niyaz
Save 30% Save 30%
Current price ₹175.00
Original price ₹250.00
Original price ₹250.00
Original price ₹250.00
(-30%)
₹175.00
Current price ₹175.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789360860431
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Rajkamal Prakashan
  • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 144
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 160 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

समस्या बड़ी हो या छोटी, उसका प्रभाव समाज के छोटे-से हिस्से पर हो या देशव्यापी हो, नियम-क़ानून द्वारा उस पर कितना क़ाबू किया जा सकता है? यह मुद्दा विचारणीय है। यह वास्तविकता है कि समस्या की जड़ में जाकर मूल कारणों की पहचान की जाए तो समस्या से मुक्ति मिल सकती है। इस दिशा में रचनाकार की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। वह समस्या की जड़ में जाकर मूल कारणों की न केवल पहचान करता है, बल्कि उनके विरुद्ध अवाम की मानसिकता का निर्माण करने की ज़िम्मेदारी भी निभाता है।

वेश्यावृत्ति का ज्वलन्त मुद्दा उपन्यास ‘कारोबारे तमन्ना’ के केन्द्र में है। निम्नवर्गीय मुस्लिम समाज की आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि में वेश्यावृत्ति के कारणों की जाँच-पड़ताल की गई है। उपन्यास वेश्याओं की जटिल जीवन-शैली और उस वृत्ति के निर्माण की पूरी प्रक्रिया यथार्थ के धरातल पर प्रस्तुत करता है। यह रचना अपनी सम्पूर्णता में उसका विरोध भी करती है।

राही मासूम रज़ा के औपन्यासिक कर्म की मुख्यधारा के बरक्स ‘कारोबारे तमन्ना’ की खूबी इसके दिलचस्प होने में है। यह अपने कथ्य के आधार पर विशिष्ट है। हिन्दी साहित्य की मुख्यधारा में लिखे उपन्यासों से इतर राही ने शाहिद अख़्तर और आफ़ाक़ हैदर नाम से उर्दू भाषा में कई उपन्यासों की रचना की। ये उपन्यास रूमानी उपन्यासों की परम्परा में परिगणित होने के कारण कभी चर्चा के लायक़ ही नहीं समझे गए।

राही मासूम रज़ा के असंख्य पाठकों हेतु एक संग्रहणीय पुस्तक।

राही मासूम रज़ा

राही मासूम रज़ा का जन्म 1 सितम्बर, 1927 को ग़ाज़ीपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। प्रारम्भिक शिक्षा वहीं हुई, बाद की पढ़ाई अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में, जहाँ से ‘उर्दू साहित्य के भारतीय व्यक्तित्व’ विषय पर पी-एच.डी. की। उसके बाद अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में ही कई वर्षों तक उर्दू साहित्य पढ़ाया। बाद में फ़िल्म-लेखन के लिए बम्बई गए। फ़िल्मों के लिए लिखने के साथ-साथ हिन्दी-उर्दू में समान रूप से सृजनात्मक लेखन किया। बी.आर. चोपड़ा के निर्देशन में बने महत्त्वपूर्ण दूरदर्शन धारावाहिक ‘महाभारत’ के पटकथा और संवाद-लेखक के रूप में प्रशंसित। एक ऐसे कवि-कथाकार, जिनके लिए भारतीयता आदमीयत का पर्याय रही।

उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं—‘आधा गाँव’, ‘टोपी शुक्ला’, ‘हिम्मत जौनपुरी’, ‘सीन : 75’, ‘ओस की बूँद’, ‘असंतोष के दिन’, ‘दिल एक सादा काग़ज़’, ‘कटरा बी आर्ज़ू’, ‘नीम का पेड़’ (हिन्दी उपन्यास); ‘मुहब्बत के सिवा’, ‘कारोबारे तमन्ना’, ‘क़यामत’ (उर्दू उपन्यास); ‘मैं एक फेरीवाला’ (हिन्दी कविता-संग्रह); ‘नया साल’, ‘मौजे गुल : मौजे सबा’, ‘रक्से मय’, ‘अजनबी शहर : अजनबी रास्ते’ (उर्दू कविता-संग्रह); ‘अट्ठारह सौ सत्तावन’ (हिन्दी-उर्दू महाकाव्य) तथा ‘छोटे आदमी की बड़ी कहानी’ (जीवनी)।

15 मार्च, 1992 को उनका निधन हुआ।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us