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Kasba "कस्बा" Stories Books | Some Intersting Stories Set Between City And Village

by Sanjay Dutt Sharma
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9788119032112
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 184
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

गांव जहाँ अपनी सोंधी मिट॒टी की सुगंध में अनगिनत किस्से-कहानियों को समाहित किए हुए हैं, वहीं शहर की चमक-धमक के पीछे भी अनगिनत कहानियाँ हैं। गाँव और शहर की इन अनगिनत कहानियों के बीच कुछ ऐसी भी कहानियाँ हैं, जो एक ओर से गाँव को छू रही होती हैं तो दूसरी ओर से शहर की झलक भी अपने अंदर समाहित किए हुए हैं | ऐसी ही कहानियों की एक श्रृंखला है यह पुस्तक “कस्बा : शहर और गाँव के बीच पकी कुछ कहानियाँ”'कस्बा” चौदह कहानियों का ऐसा संकलन है, जो अपने अंदर कई सारी भावनाओं को समाहित किए हुए है और जिसकी हर कहानी जानी-पहचानी व देखी-देखी सी लगती है। इन कहानियों में अनेक भाव, जेसे प्रेम, भक्ति, सरलता, आडंबर, हास्य, भय, धूर्तता, संतोष, विश्वास, साहस आदि देखने को मिलते हैं| कहीं कोई कहानी व्यंग्य के रूप में कटाक्ष करती है तो कहीं कोई कहानी धीमे से कुछ ऐसा कह जाती है, जो हम जानते हुए भी कह नहीं पाते | गाँव और शहर की कुछ खट्‌टी, कुछ मीठी अनुभूतियों का कहानी संकलन है 'कस्बा?

सँजय दत्त शर्माउत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे जलेसर में स्थित भगवान्‌ श्री द्वारकाधीशजी के मंदिर में अपने पिताजी व भाइयों के साथ सेवा करते हुए, वहाँ उपलब्ध प्राचीन पुस्तकों और नब्बे के दशक में आने वाली कॉमिक्सों को पढ़ते-पढ़ते बचपन में कब हिंदी साहित्य से लगाव हो गया, पता ही नहीं चला । आगरा के सेंट जॉन्स कॉलेज से कॉमर्स स्नातक और विधि स्नातक की शिक्षा के दौरान वरिष्ठ रंगकर्मा श्री राजेंद्र रघुवंशीजी के यहाँ रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिसमें रंगमंच और लेखन की प्रेरणा मिली। दैनिक समाचार- पत्रों में नियमित रूप से लेख प्रकाशित होने लगे; साथ ही कॉलेज में भी अपनी कविताओं व नाटकों के द्वारा साहित्य तथा रंगमंच में सक्रिय रहे । दो सौ से अधिक नुक्कड़ नाटकों में अभिनय भी किया।विधि स्नातक होने के उपरांत रोजगार की तलाश आगरा से दिल्‍ली ले आई और गाजियाबाद में अपना स्थायी निवास बना लिया। लगभग पंद्रह वर्ष से अधिक समय तक निजी कंपनियों के विधि विभाग में कार्य करते हुए भी ललित फाउंडेशन के साथ जुड़कर नेशनल टेलीविजन और कई सारे मंचों पर काव्यपाठ किया। इ-मेल : author.sanjaydutt@mail.com

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