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Kashmir Ka Sanskritik Avabodh Aur Samkaleen Vimarsh

by Ed. By Prof. Kripashankar Chaubey , Dr. Amit Kumar Bishwas
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789355212573
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 220
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 175 grams
  • BISAC Subject(s): General

स्वतंत्रता के बाद के 75 वर्षो में कुछ प्रत्यय अर्थात्‌ गहन चर्चा के, गंभीर विमर्श के विषय बने रहे हैं। उनमें कश्मीरियत सबसे प्रमुख प्रत्यय है। कश्मीरियत अर्थात्‌ कश्मीर की पहचान । कश्मीर के लोगों का वैशिष्ट्य । पर इस विमर्श में सर्वदा दो हिस्से दिखाई देते रहे।एक वह जो कश्मीरियत को भारत से असंपृक्‍त, विभक्त और एकांतिक रूप में देखता रहा है तो दूसरी ओर वह जो कश्मीरियत को भारतीयता के उत्सबिंदु के रूप में देखता है। पर देखने की ये दोनों दृष्टियां सांस्कृतिक कम, राजनीतिक अधिक हैं। यह पुस्तक कश्मीर को नए तरीके से नहीं बल्कि यत्न है कश्मीर को सम्यक्‌ तरीके से देखना या समग्रता में देखना। पार होकर देखना और पारावार में देखना। पौराणिकता में देखना तो आधुनिकता में देखना । दोनों या पौराणिकता और आधुनिकता के बीच निरंतरता में देखने से ही सुरभि होती है।ठहराव सड़न और दुर्गध पैदा करती है। ठहराव खत्म हुआ है तो निरंतरता आएगी। इस विश्वास के साथ इस पुस्तक में सांस्कृतिक अवबोध और समकालीन विमर्श को काल के सातत्य में रखने की कोशिश की गई है।

प्रो. कृपाशंकर चौबेवृत्ति : पत्रकारिता और अध्यापन। ढाई दशकों तक “जनसत्ता, 'हिंदुस्तान', “सहारा समय', 'सन्मार्ग', 'प्रभात खबर', “स्वतंत्र भारत' तथा “आज में पत्रकारिता करने के बाद जुलाई 2009 से महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में पूर्णालिक अध्यापन।प्रमुख मौलिक पुस्तकें : चलकर आए शब्द, पत्रकारिता के उत्तर आधुनिक चरण, राष्ट्र निर्माताओं की पत्रकारिता, संवाद चलता रहे, रंग, स्वर और शब्द, महाअरण्य की माँ, मृणाल सेन का छायालोक, करुणामूर्ति मदर टेरेसा, समाज, संस्कृति और समय, मीडिया संस्कृति समय, दलित आंदोलन और बाँग्ला साहित्य, नजरबंद तसलीमा, पानी रे पानी।संपादित पुस्तकें : सात ग्रंथों और दस स्कूली पाठ्य पुस्तकों का संपादन। 2003 से 2006 तक बाँग्ला मासिक ' भाषाबंधन ' तथा 2007 से 2012 तक बाला त्रैमासिक 'वर्तिका' का अवैतनिक संपादन। 2020 से “बहुवचन' के समन्वयक संपादक।बीस से अधिक वृत्तचित्रों और दृश्य, श्रव्य, शैक्षणिक कार्यक्रमों का निर्माण और निर्देशन । संप्रति : प्रोफेसर, जनसंचार विभाग, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा ।दूरभाष : 09836219078इ-मेल : drkschaubey@gmail.com

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