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Krishnadharma Main

by Prabha Khetan
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789389563856
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 48
  • Original Price: INR 99.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 100 grams
  • BISAC Subject(s): General

मेरी इस पूरी कविता में कृष्ण मौजूद हैं उनकी मौजूदगी उस कौंध की मौजूदगी है जो कभी दिखती है कभी नहीं दिखती, मगर लापता कभी नहीं होती। हाँ, यह भी सच है कि मेरे पास ऐसा कोई विज़न नहीं, बस कहीं कछ आत्मा की गहराई में ज़रूर घटा कि अपने वैयक्तिक अनुभवों का अतिक्रमण करते हुए मैंने खुद यह राह चुनी; उस आग को कुरेदा, जो इच्छा, आकांक्षाओं और महत्त्वाकांक्षाओं की राख के नीचे एक मानवीय आग बनकर सुलग रही थी। पूरी रचना के दौरान मैं आज की चुनौतियों के बीच अपने को कृष्ण की साझीदार पाती रही हूँ हास-उल्लास के क्षणों से लेकर महाभारत के महासंहार तक के प्रकरणों के बीच, केलि-कुंजों से लेकर प्रभास-तीर्थ तक की रचना-यात्रा के बीच। शायद साझेदारी के इस एहसास ने ही मुझे स्थूल कथा-सूत्रों से बचाकर चेतना के स्तर पर कृष्ण से जोड़ा है, कृष्णधर्मा बनाया है।

जन्म: 1 नवम्बर, 1942 शिक्षा: एम.ए. पी-एच.डी. (दर्शनशास्त्र) प्रकाशित कृतियाँ उपन्यास: आओ पेपे घर चलें !, छिन्नमस्ता, पीली आँधी, अग्निसंभवा, तालाबंदी, अपने-अपने चेहरे। कविता: अपरिचित उजाले, सीढ़ियाँ चढ़ती हुई मैं, एक और आकाश की खोज में, कृष्ण धर्मा मैं, हुस्न बानो और अन्य कविताएँ, अहल्या। चिंतन: उपनिवेश में स्त्री, सार्त्र का अस्तित्ववाद, शब्दों का मसीहा: सार्त्र, अल्बेयर कामू: वह पहला आदमी। अनुवाद: साँकलों में कैद कुछ क्षितिज (कुछ दक्षिण अफ्रीकी कविताएँ), स्त्री: उपेक्षिता (सीमोन द बोउवार की विश्व-प्रसिद्ध कृति ‘द सेकंड सेक्स’)। संपादन: एक और पहचान, ‘हंस’ का स्त्री विशेषांक भूमंडलीकरण: पितृसत्ता के नये रूप। निधन: 20 सितम्बर, 2008।

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