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Lata Didi: Ajeeb Dastan Hai Ye

by Harish Bhimani
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789352291434
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 374
  • Original Price: INR 325.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 3rd Edition
  • Item Weight: 450 grams
  • BISAC Subject(s): Film / General

लता दीदी : अजीब दास्ताँ है - 'लड़की एक रोज़ गाती है गाती रहती है - अनवरत।यह जगत व्यावहारिकता पर चलता है, तेरे गीतों से किसी का पेट नहीं भरता। फिर भी लोग सुनते जा रहे हैं पागलों की तरह'। -विजय तेंडुलकर'लता दीदी अजीब दास्ताँ है यह....' एक खोज।इस खोज की शुरुआत तो हुई होगी करोड़ों संगीत रसिकों के मस्तिष्क में, लेकिन अपार लोकप्रियता के बावजूद लता मंगेशकर एक गूढ़ रहस्य ही बनी हुई हैं।लेखक की खोज का आरम्भ हुआ एक व्यावसायिक भेंट से, जिसकी परिणति हुई 21 देशों और 53 शहरों में हुए 139 कार्यक्रमों में, लता जी के साथ उनके उद्घोषक की ज़िम्मेदारी निभाते हुए और लेखक ने पाया लता जी के व्यक्तित्व को नज़दीक से जानने का दुर्लभ अवसर।लता यात्रा की प्रवास डायरी ने समय रहते जीवनी का स्वरूप ग्रहण कर लिया। इस जीवन की कथा में विश्लेषण का नज़रिया है, तो साथ-साथ एक अति सफल फिर भी एकाकी कलाकार के प्रति सहृदयता भी। इसीलिए यह पुस्तक पढ़ते हुए, इस चमत्कारिक गायिका के जीवन के कुछ अज्ञात पहलुओं की जानकारी पाते हुए, इस किंवदंती नुमा गायिका को ग़ैरमामूली मौजूदगी का अहसास भी होता है। लेखक का कहना है, 'यह अजीब दास्तान लता जी के व्यक्तित्व का रहस्योद्घाटन है।'कोकिल कंठी गायिका की तरह, एक संगे-मील।

हरीश भीमानी - शिक्षा बिजनेस मैनेजमेंट की लेकिन मानस लेखक का-हरीश भिमानी आवाज़ की दुनिया में आये विज्ञापनों के ज़रिये और टी.वी. सीरियल महाभारत में 'समय', भगवद्गीता, गायत्री को स्वर देकर घर-घर में जानी-पहचानी आवाज़ बन गये और वही आवाज़ उन्हें ले गयी दुनिया भर के देशों में अनेक जानेमाने भारतीय कलाकारों के कार्यक्रमों का संचालन करने। बम्बई दूरदर्शन के तत्कालीन सबसे लोकप्रिय समाचारदाता हरीश लेखन की ओर मुड़े, टी.वी. सीरियल खानदान के साथ सुबह, सुकन्या, ग्रहण एवं इनकार के लिए पटकथा-संवाद लिखने के अलावा, आप अनगिनत विज्ञापन, कार्पोरेट फ़िल्में एवं रसप्रद रेडियो कार्यक्रम लिखते आये हैं, जिनमें से कई, भारतीय आबादीवाले देशों में भी प्रसारित होते रहे।लेकिन विज्ञापनलोक की अन्तिम तिथियों की आपाधापी से परे, स्थायित्व और सन्तुष्टि प्रदान करने वाला इनका लेखन है यह पुस्तक, जिसके सृजन में हरीश को सात वर्ष लगे। एच.एम.वी. से गोल्ड डिस्क पाने वाले एकमात्र उद्घोषक हरीश भिमानी, रेडियो, मंच एवं टी.वी. कार्यक्रमों के कुशल एवं सेवक संचालन के लिए माने हुए हैं। आप समय मिलने पर व्यापार प्रबन्धन महाविद्यालयों में अतिथि प्राध्यापक के रूप में सेवा देते हैं और फ़िल्म सेन्सर्स की सलाहकार समिति के सदस्य भी रह चुके हैं।आज हरीश अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वॉइस रेकॉर्डिंग करते हुए लेखन तथा इंटरनेट के आभासी विश्व (वर्चुअल वल्ड) में टीम काम कर रहे हैं।

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