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Mahamari Raja Ka Aakhyan

by Lars Andersson
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350002421
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 102
  • Original Price: INR 200.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): General

महामारी राजा का आख्यान - अगर ऐसे बच्चे नज़र आते जो उस वक़्त बीमार न हों पर माता-पिता ख़ुद में रोग के लक्षण देख रहे हों, वे उन्हें बाहर रख देते, ग्योपा ने बताया, कभी तो ऐसी किसी भी चीज़ पर जो तैरती हो और उन्हें भरसक अच्छी तरह लपेट-बाँध देते। नदी की धार में बहा देते। छोटी सी नाँद तक में, पीठ बल लिटाये गये, वे दक्षिण दिशा में बहते जाते, मानो बादलों पर तिर रहे हों।“क्योंकि शायद” उसने कहा, अगले गाँव में लोग हों, जो बचे हों। या शायद उसके बाद वाले गाँव मे।वह अभी भी राजा की ओर पीठ किये बैठा था और उसके सामने आग छोटी स्याह लपटों में नाच रही थी।"शायद यही हुआ हो," उसने कहा। "हो सकता है एक-दो बचा लिए गये हों, मैं नहीं जानता। मैं तो उस पर विचार कर रहा हूँ जो मैंने यहाँ ऊपर आते समय तट के पास देखा था।"-पुस्तक से

लार्श एण्डसन - लार्श एण्डसन (जन्म कार्ल्सकुगा, स्वीडन; 1954) का पहला उपन्यास तब छपा था, जब उनकी उम्र सिर्फ़ बीस वर्ष थी, और वे तब से ही अपनी पीढ़ी के सर्वाधिक प्रशंसित लेखकों में गिने जाते रहे हैं। उनके बारह अन्य उपन्यासों में से कुछ जर्मन, फ्रेंच, स्पैनिश व अन्य यूरोपीय भाषाओं में अनूदित हो चुके हैं। कुछ वर्ष उन्होंने उप्पसाला विश्वविद्यालय चिकित्साशास्त्र का अध्ययन करते हुए बिताये, लेकिन 1980 से पूर्णकालिक लेखन कार्य में जुट गये। वैसे तो उन्होंने विविध विधाओं में रचना की, परन्तु वे मुख्यतः उपन्यासकार के रूप में प्रख्यात हैं। स्वीडन के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों तथा पत्रिकाओं में भी वे नियमित योगदान करते हैं।उनके हालिया उपन्यास को 'सर्वहारा लेखक' पुरस्कार, जो इवार ल-युहान्सन के नाम पर है, से नवाज़ा गया। वे वैर्मलाण्ड प्रान्त के ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं, जो उनके कई उपन्यासों, मे इस मौजूदा कथा, की पृष्ठभूमि है। 1986 से लगभग एक दशक तक वे भारत यात्रा पर कई बार आये। यह अनुभव उनके तीन हालिया उपन्यासों में प्रतिबिम्बित होता है। इन उपन्यासों में उन्होंने नर्मदा पर बने बाँधों, भारत में नदियों की पूजा-अर्चना तथा औपनिवेशिक काल में जन-आन्दोलन के तत्वों को उजागर किया है। उन्होंने हिन्दी कवि तेजी ग्रोवर के साथ स्वीडी कविताओं के संकलन 'बर्फ़ की ख़ुशबू' का सह-सम्पादन भी किया है। 2006 में स्वीडीश सरकार ने उन्हें आजीवन अनुदान से सम्मानित किया है।लार्श एण्डरसन की कुछ चुनिन्दा किताबें - Brandlyra, (अग्नि का साज़) उपन्यास, 1974 Snöljus, (बर्फ़ की रोशनी) उपन्यास, 1979 Bikungskupan ( मधुमक्खी राजा का छत्ता) उपन्यास, 1982Vattenorgein, (पानी का ऑर्गन) उपन्यास, 1998 Artemis, (आतिमिस) उपन्यास, 1995, Kavita, (कविता) उपन्यास, 2001Berget, (पर्वत) उपन्यास, 2002, Vágen till Gondwana, (गोंडवाना भूमि में) उपन्यास, 2004।प्रमुख पुरस्कार :स्वेन्स्का डागब्लाडेट साहित्य पुरस्कार, 1982 सेल्मा लागरलोफ साहित्य पुरस्कार, 1990 स्वीडी रेडियो श्रीता पुरस्कार, 1993स्वीडी अकादमी का 'द एक्सल हिश' पुरस्कार, 1996पूर्वा याज्ञिक कुशवाहा :वैकल्पिक शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण उपस्थिति के रूप में जानी जाती हैं। उन्होंने Totto Chan नामक जापानी कृति से अनुवाद का काम शुरू किया था और जॉन होल्ट और जार्ज डेनिसन सहित बीसवीं शताब्दी के कई महान शिक्षाविदों की पुस्तकों का सरस अनुवाद किया है। उनकी अनूदित पुस्तकों में 'बच्चे असफल कैसे होते हैं' की 70,000 से अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हैं। हाल ही में (2009) उनके द्वारा संकलित एवं सम्पादित एक अनूठी पुस्तक 'मित्थल मौसी परिवार पुराण' हार्पर कॉलिन्स से छपी है। वे जयपुर में रहती हैं।अमित :विगत लगभग 17 सालों से सामाजिक-राजनीतिक आन्दोलनों से जुड़े हुए हैं और साथ ही पत्र-पत्रिकाओं में स्वतन्त्र लेखन तथा अनुवाद भी करते हैं। वर्तमान में होशंगाबाद में रहते हैं।

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