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Majaj Zindagi Aur Shairy

by Suresh Salil
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789350724422
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 80
  • Original Price: INR 125.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 150 grams
  • BISAC Subject(s): General

“मजाज़ की शा’इरी में क्लासिकल शायरों की सी शालीनता और सादगी है। दूसरी विशेषता यह है कि उनके काव्य में शब्द का सौन्दर्य और भाषा की नज़ाकत औरों से बहुत बढ़कर है।...उन्होंने नौजवानों की दृढ़ता, सरफ़रोशी की भावना, जोश, फक्कड़ाना आनबान, बेबाकी और स्वच्छन्दता को केवल - सौन्दर्य उत्पन्न करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन को ओजपूर्ण बनाने के लिए अपने काव्य में प्रयुक्त किया है। एक तरफ़ वे नौजवानों में एक योद्धा का जोश उत्पन्न करना चाहते हैं, तो दूसरी ओर औरतों का भी जीवन के युद्ध में शामिल होने का आह्वान करते हैं।...मजाज़ दरअस्ल सौन्दर्य के उपासक हैं। यूँ तो वह लैला-ए-इंक़लाब का भी मजनूँ है, मगर सौन्दर्य की हर अदा का इशारा समझने में निपुण है। उसकी सौन्दर्य-उपासना में प्रेमी का जुनून है। सौन्दर्य उसके लिए सब कुछ है।...मजाज़ की ज़िन्दगी और शा'इरी में रूमानियत की एक लहर हरदम उमड़ती रहती है। तिफ़्ली के ख्वाब से ऐतराफ़ तक एक ख़ास सिलसिलेवार दास्तान है। मजाज़ की रूमानियत में जो जानदार, स्वस्थ और शालीन है उसका उर्दू शा’इरी में हरदम मूल्य रहेगा।...”

सुरेश सलिल(जन्म 19 जून 1942)हिन्दी के समर्थ कवि, आलोचक और साहित्यिक इतिहास के गहन अध्येता हैं। गणेश शंकर विद्यार्थी के कृतित्व और व्यक्तित्व पर अनेक प्रकाशनों के अतिरिक्त एक कविति संग्रह खुले में खड़े होकर प्रकाशित हुआ है। बच्चों व किशोरों के लिए भी इन्होंने कई किताबें प्रकाशित की हैं। श्री सलिल ने गणेशशंकर विद्यार्थी से संबंधित कई पुस्तकें लिखी हैं जिनमें उनकी जेल डायरी विशेष चर्चित रही। श्री सलिल ने विश्व की कई कालजयी कृतियों का अनुवाद भी किया है। गंगादासपुर, ज़िला उन्नाव, उत्तर प्रदेश है। कृतियाँ: खुले में खड़े होकर (1990) (कविता संग्रह),मेरा ठिकाना क्या पूछो हो (2004) (ग़ज़ल संग्रह), साठोत्तरी कविता: छह कवि (पाँच कवियों की सवक्तव्य कविताएँ),(1969),अनुवाद:मकदूनिया की कविताएँ (1992),अपनी जुबान में: विश्व की विभिन्न भाषाओं की कहानियाँ(1996),मध्यवर्ग का शोकगीत: जर्मन कवि हांस माग्नुस एंत्सेंसबर्गर की कविताएँ (1999),पढ़ते हुए (2000) दुनिया का सबसे गहरा महासागर: चेक कवि मिरोस्लाव होलुब की कविताएँ (2000),रोशनी की खिड़कियाँ : इकतीस भाषाओं के एक सौ बारह कवि (2003),देखेंगे उजले दिन: नाज़िम हिकमत की कविताएँ (2003),जापान : साहित्य की झलक (सहयोगी संकलन),मक़दुनिया की कविताएं (तनाव) श्रृंखला में प्रकाशित,अपनी जुबान में (विश्व की कई भाषाओं से चुनी हुई कहानियों का अनुवाद),उंगारेत्ती की अनूदित कविताएँ:प्राण-पीड़ा / उंगारेत्ती, कोई और रात / उंगारेत्ती, सितारे / उंगारेत्ती संपादित गणेशशंकर विद्यार्थी रचनावली: चार खंड,वली की सौ ग़ज़लें(2004),नागार्जुन: प्रतिनिधि कविताएँ (1999)।

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