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Maujood

by Rahat Indori
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788183616966
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Radhakrishna Prakashan
  • Publisher Imprint: Radhakrishna Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 124
  • Original Price: INR 299.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 3rd Ed.
  • Item Weight: 266 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

राहत साहब मेरे बड़े पुराने दोस्त हैं, लगभग चालीस बरस से मेरी और उनकी दोस्ती क़ायम है। वो एक बड़े शायर और एक सच्चे इनसान हैं। सच्चा इनसान उसे कहता हूँ, जो अच्छाइयों को ही नहीं बुराइयों को भी प्यार कर सके। मेरा व्यक्तित्व भी अच्छाइयों और बुराइयों का नमूना है और राहत का भी। इसीलिए तो मैं कहता हूँ कि फ़रिश्तों के टूटे हुए ख़्वाब का एक नाम राहत है। राहत ने जीवन और जगत के विभिन्न पहलुओं पर जो ग़ज़लें कही हैं, वो हिन्दी-उर्दू की शायरी के लिए एक नया दरवाज़ा खोलती हैं। वर्तमान परिवेश पर जो टिप्पणी उन्होंने अपनी ग़ज़लों में की है वो आज की राजनीति, आज की साम्प्रदायिकता, धार्मिक पाखंड और पर्यावरण पर बड़े ही मार्मिक भाव से की है। छोटी-बड़ी बहर की ग़ज़ल में उनका प्रतीक और बिम्ब विद्यमान है, जो नितान्त मौलिक और अद्वितीय है। उनके कितने ही शे’र ऐसे हैं जो ज़ुबान पर बरबस बैठे जाते हैं। नए रदीफ़, नई बहर, नए मज़मून, नया शिल्प उनकी ग़ज़लों में जादू की तरह बिखरा है और पढ़ने व सुननेवाले सभी के दिलों पर छा जाता है। राहत की शायरी तसव्वुफ़ की उच्चतम ऊँचाइयों तक पहुँचती है। उनका ये शे’र मेरे ज़ेहन में अक्सर कौंधता रहता है—

किसने दस्तक दी है दिल पर, कौन है?

आप तो अन्दर हैं, बाहर कौन है...?

भाई राहत की सोच एक सच्चे इनसान की सोच है। वो यद्यपि अपनी उम्र से अधेड़ दिखाई पड़ते हैं लेकिन आज भी उनके दिल में एक मासूम-सा बच्चा है जो बिना किसी भय के सच बोलना जानता है। मुझे विश्वास है कि पाठक उनके इस ग़ज़ल-संग्रह ‘मौजूद’ को भी बड़े प्यार और सम्मान से ग्रहण करेंगे।

—गोपालदास नीरज

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