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Mere Hisse ka Aasmaan

by Veena Amrit
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789371126069
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 116
  • Original Price: INR 295.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 150 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

कविता हमारे सुख-दुख का बही खाता है। मन के भीतर कितना कुछ बनता-बिगड़ता रहता है। हर काल में विचरण करती हैं वीणा अमृत की कविताएँ। पीछे मुड़ कर देखना, भविष्य की कल्पना करना और वर्तमान का यथार्थ अलग तरह से परिभाषित होता है इन कविताओं में। कभी सपाट सड़क पर, कभी ऊबड़-खाबड़ पगडण्डी पर शब्द टहलते हैं। कितना कुछ सहेजना होता है जीवन में! भीतर ताक-झाँक करते हैं तभी तो उपजती है कविता। फैलाव के बीच सिकुड़ते चले जाना। शून्य हो जाने की चाह -जहाँ पीड़ाएँ उत्सव गीत गाती हैं... सात खण्डों में फैलता/सिमटता वीणा अमृत का कविता-संग्रह हमें उसके फ़क़ीरी मन से मिलाता है। वे अपनी बात सूक्ष्मता में कहती हैं। सब क्षणिक है, मोह-माया है। सुख और दुख का कोई विशेष महत्त्व नहीं। इन सब से अलग कुछ है। आत्म साक्षात्कार करती है वीणा। यहाँ बाहर से भीतर तक फैला है भाव भूगोल। सम्बन्धों की शाश्वत खोज, व्याकुलता से उपजा वैराग्य भाव है। और बहुत बड़ी सीख भी —परित्याग–दम्भ का, स्वार्थ का, झूठ का, दर्प का बहिष्कार-भेद का, भ्रम का, अलगाव का, आत्मश्लाघा का चुनाव- शान्ति का, सुख का, न्याय का, सदाचार का... ये कविताएँ अध्यात्म का पाठ ही नहीं, जीने का सलीका भी सिखाती हैं। इन कविताओं की यात्रा सात्त्विक हो.... —चित्रा देसाई ***वीणा अमृत की कविताएँ मानवीय अनुभूति को तीव्र करने वाली कविताएँ हैं जो मन से अनुभूत होकर आत्मा तक पहुँचती हैं “मेरी व्यथा/ पीड़ा... मिल गये सब के सब पंचमहाभूत में, मैं और मेरी पीड़ाएँ मुक्त स्वर में उत्सव गीत गाती हैं" इसे पढ़ते हुए अक्सर ही आँखें नम होती हैं। इनकी कविताओं की पंक्तियाँ “निस्सीम आकाश का विस्तार लिये चाहती हूँ शून्य हो जाना”... “शरीर से अशरीर की यात्रा सरल नहीं”, “हिमखण्ड से घिरी/अग्नि सी जलती/ मृत्यु पाश में बँधी जीवन के गीत लिखती/ मैं प्रकृति” में जीवन की यथार्थता और आध्यात्मिकता से भरा भाव बोध है। हमारे देश में जिस तरह की घृणा, कठोरता और अज्ञान की आँधी चली है ऐसे समय में वीणा अमृत की कविताएँ पूरे देश में सौहार्द, प्रेम और सहिष्णुता को प्रगाढ़ करेंगी। इनकी कविताओं में भारतीय जिजीविषा को उद्दीप्त करने की अन्तहीन सम्भावनाएँ हैं। —आलोक धन्वा

वीणा अमृत देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में कविता, कहानी एवं दार्शनिक आलेख निरन्तर प्रकाशित। प्रकाशित पुस्तकें : दर्शनशास्त्र और साहित्य से सम्बन्धित पुस्तक धार्मिकता का संप्रत्यय (भगवद्गीता के परिप्रेक्ष्य में), मानवाधिकार का दार्शनिक अनुशीलन, कबीर का दर्शन, सामाजिक न्याय एवं शिक्षा। सम्पादन : आयाम : साहित्य का स्त्री स्वर (पत्रिका)। समकालीन राजनीति में नैतिकता का संकट (पुस्तक)। गतिविधियाँ : काव्य लेखन के साथ विभिन्न मंचों एवं दूरदर्शन पर कविता पाठ व साहित्यिक परिचर्चाओं में सक्रिय सहभागिता। साहित्य और दर्शन पर आधारित राष्ट्रीय स्तर के महत्त्वपूर्ण जर्नल में 30 से अधिक शोधपत्र एवं आलेख का प्रकाशन। वर्ल्ड फिलॉसफ़ी कांग्रेस, एथेंस (ग्रीस), हैम्बर्ग यूनिवर्सिटी (जर्मनी), विश्व हिन्दी सम्मेलन (मॉरीशस) एवं नेहरू सेंटर (लन्दन) जैसे विश्वस्तरीय अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं कॉन्फ्रेंस में अनेक शोधपत्रों की प्रस्तुति। सम्मान एवं पुरस्कार : हिन्दी भाषा के क्षेत्र में कार्य हेतु हिन्दी दिवस के अवसर पर तत्कालीन शिक्षा मन्त्री, बिहार सरकार द्वारा सम्मानित (2017), 'हिन्दी सेवी सम्मान' (मॉरीशस, 2018), ‘साहित्य गौरव सम्मान' (विज्ञान भवन, नयी दिल्ली, 2020), 'हिन्दी सारस्वत सम्मान' (नेहरू सेंटर, लन्दन, 2023)।

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