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Paap Aur Punya

by Guru Datt
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789355211521
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 208
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): Religion / Biblical Studies

"यशस्वी रचनाकार स्व. गुरुदत्त ने रसायन विज्ञान (कैमिस्ट्री) में एम.एस-सी. करने के पश्चात्‌ आयुर्वेद का ज्ञान प्राप्त किया, साथ-ही-साथ भारतीय आर्षषष ग्रंथों का गहन अध्ययन किया।उन्होंने अपने पाठकों को अपने उपन्यासों के पात्रों के माध्यम से इन ग्रंथों का ज्ञान अत्यंत रुचिकर ढंग से दिया। प्रस्तुत उपन्यास 'पाप और पुण्य' की पात्र श्रीमद्भगवद्गीता के संदर्भ से पाप और पुण्य को परिभाषित करती है। वह समझाती है कि कुछ कार्य पाप नहीं होते, परंतु कानून की दृष्टि में अपराध होते हैं । इसी प्रकार कई कार्य कानून की दृष्टि में अपराध न होते हुए भी पाप होते हैं। ऐसा क्‍यों है ? यही इस उपन्यास का विषय है।रोचकता से भरपूर कथा वर्तमान कानून व्यवस्था पर करारी चोट करती है। लेखक अपने इस पठनीय उपन्यास के पात्रों के माध्यम से हमें उस राह पर चलने का परामर्श देते हैं, जो न पापमय हों और न ही वर्तमान कानून की दृष्टि में अपराध हों। उपन्यास की तेज गति पाठक को बाँधकर रखती है और वह इसे आरंभ कर समाप्त किए बिना नहीं छोड़ सकता ।--पद्मेश दत्त

गुरुदत्त - 8 दिसंबर, 1894 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में जनमे गुरुदत्त हिंदी साहित्य के देदीप्यमान नक्षत्र हैं। इन्हें 'क्रांतिकारियों का गुरु ' कहा जाता है । जब ये नेशनल कॉलेज, लाहोौर में हेडमास्टर थे, तो सरदार भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु इनके सबसे प्रिय शिष्य थे, जो बाद में आजादी की जंग में फाँसी का फंदा चूमकर अमर हो गए। उन्होंने दो सौ से अधिक उपन्यास लिखकर अपार ख्याति अर्जित की। संयुक्त राष्ट्र महासंघ के साहित्यिक संगठन 'यूनेस्को' द्वारा सन्‌ 1973 में जारी एक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार गुरुदत्त 1960-1970 के दशकों में हिंदी साहित्य में सर्वाधिक पढ़े जानेवाले लेखक रहे हैं। 'स्वाधीनता के पथ पर', 'स्वराज्य दान', 'दासता के नए रूप' (राजनीतिक उपन्यास), “कुमारसंभव', अग्नि-परीक्षा', “परित्राणाय साधूनाम्‌” (पौराणिक उपन्यास), 'पुष्यमित्र', “विक्रमादित्य ', 'पत्रलता', "गंगा की धारा (ऐतिहासिक उपन्यास) के साथ-साथ ' देश की हत्या' उनका सर्वाधिक चर्चित उपन्यास है। स्मृतिशेष : 8 अप्रैल, 1989।

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