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Pablo Neruda Prem Kavitayen

by Ed. by Suresh Salil
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789387024571
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 126
  • Original Price: INR 195.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 3rd Edition
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): General

पाब्लो नेरूदा : प्रेम कविताएँ - विश्व कविता के शताब्दी पुरुष और सर्जनात्मकता का कीर्तिमान स्थापित करने वाले महाकवि पाब्लो नेरूदा (1904-1973) की प्रेम कविताओं की यह प्रस्तुति कवि की जन्मशती से सन्दर्भित मानी जा सकती है। पहले खंड में नेरूदा की अत्यन्त प्रशंसित एवं लोकप्रिय काव्यकृति 'बीस प्रेम कविताएँ और विषाद का एक गीत' (अनु. मधु शर्मा) उसके सम्पूर्ण पाठ में लक्ष्य की जायेगी। दूसरे खंड में 'दि कैप्टेंस वर्सेस' की कुल 42 कविताओं में से 22 कविताएँ ली गयी हैं और तीसरे खंड में कवि के निधनोपरान्त पहली बार प्रकाशित काव्यकृतियों में से चुनकर कतिपय कविताएँ दी गयी हैं, जो मानव-प्रेम के विश्विक आयाम का एक सर्वथा मौलिक पाठ प्रस्तुत करती हैं।'पाब्लो नेरूदा : प्रेम कविताएँ' अपनी तरह की एक विशिष्ट प्रस्तुति है, जो नेरूदा के काव्य-व्यक्तित्व के एक अत्यन्त महत्वपूर्ण पक्ष को, कविता की शर्त पर, हिन्दी में पहली बार ला रही है।

पाब्लो नेरूदा : (1904-1973) बीसवीं सदी के सर्वाधिक सृजनशील कवि हैं। उनका जन्म चीले के पाराल ग्रामांचल में हुआ और सांतियागो में शिक्षा पायी। अध्ययन काल में ही उनकी काव्यकृतियों का प्रकाशन शुरू हुआ और स्टूडेंट फेडरेशन की सक्रियताओं से राजनीतिक समझ विकसित हुई। अध्ययन के उपरान्त राजनयिक सेवा में रहे। स्पेन के गृहयुद्ध में रिपब्लिकंस के पक्ष में नेतृत्वकारी भूमिका निभायी और 1970 के दशक के अन्त में अय्येंदे के नेतृत्व वाली चीले की समाजवादी सरकार के सबसे सशक्त पक्षपोषक के रूप में उभरे। नेरूदा की सर्वप्रसिद्ध काव्यकृतियों में 'ट्वेंटी लव पोएम्स एण्ड ए सांग ऑफ़ डिस्पेयर', 'रेज़िडेंस ऑन अर्थ', 'कैटो जनरल', 'दि कैप्टेंस वर्सेस' और 'फुली एम्पावर्ड' के नाम प्रमुख हैं। उनकी आत्मकथा 'मेमॉयर्स' भी दुनिया भर में ख़ूब पढ़ी और सराही गयी। 1950 में पिकासो और पॉल रॉब्सन के साथ उन्हें विश्व शान्ति पुरस्कार तथा 1973 में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। उनका निधन 1973 में, सैनिक प्रतिक्रान्ति के ज़रिये, अय्येदे सरकार के तख़्ता पलट के ठीक बाद हुआ।हिन्दी काव्यानुवाद में 'ट्वेंटी लव पोएम्स एण्ड ए सांग ऑफ़ डिस्पेयर' तथा 'दि कैप्टेंस वर्सेस' की यह पहली प्रस्तुति है, जो नेरूदा की प्रेमपरक कविताओं का व्यापक संसार काव्यप्रेमियों के लिए उद्घाटित करती है।

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