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Padikkama

by Sangeeta Gundecha
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9788119014637
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 108
  • Original Price: INR 299.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): General

संगीता गुन्देचा के नये कविता संग्रह के चार हिस्से हैं, 'पडिक्कमा', 'जी' कविताएँ, 'पीले पत्ते पर पड़ी लाल लकीर' और 'उदाहरण काव्य' । ये सिर्फ़ औपचारिक विभाजन नहीं है। इन सभी हिस्सों में अलग तरह की कविताएँ हैं । 'पडिक्कमा' में पडिक्कमा कविता के अलावा और भी कविताएँ हैं जिनमें प्रकृति और मनुष्य, मनुष्य और मनुष्य एवं मनुष्य और देवत्व के सम्बन्धों पर हल्का-सा प्रकाश पड़ता है, इतना हल्का कि वे कुछ-कुछ दिखायी भी देते हैं और कुछ-कुछ अदृश्य रहे आते हैं। कविता में उपस्थित ये अदृश्य इलाक़े ही पाठक की कल्पना के लिए अवकाश जुटाते हैं। इस हिस्से की सबसे अलग कविता 'पडिक्कमा' है। यह कविता अपने आत्मीयों की मृत्यु के बाद शोक के मन पर ठहर जाने के पहले के बेचैन अवसाद को प्रकट करती है । ऐसा प्रयास हिन्दी में बहुत कम हुआ है। इसमें 'बारिश' और 'बादल' जैसे शब्दों का दोहराव मानो शोक में ठहर जाने के पहले मन के हाँफने को ध्वनित करता है। यह कविता मृत्यु का अनुभव कर रहे व्यक्ति के मन का झंझावात है जिसमें मानो पूरी प्रकृति समा गयी हो। इस संग्रह की 'जी' कविताएँ एक बुज़ुर्ग स्त्री का कुछ इस तरह वर्णन करती हैं जैसे वह बिना किसी भय या शोक के पूरी सहजता के साथ संसार छोड़कर जा रही हो। इन कविताओं को पढ़ते हुए जीवन और मृत्यु के बीच के नैरन्तर्य का गहन अनुभव होता है। 'पीले पत्ते पर पड़ी लाल लकीर' में छोटी कविताएँ हैं, जिन्हें कवि ने 'हाइकुनुमा' नाम से पुकारा है। इन पर निश्चय ही जापानी काव्य-रूप हाईकु का असर है क्योंकि ये कविताएँ एक क्षण के विराट रूप को थामने बल्कि उसकी ओर इशारा करने, उसे अनुभव के दायरे में लाने के प्रयास में लिखी गयी हैं । इनकी क्षणिक कौंध में मन का विराट भू-दृश्य आलोकित हो उठता है, जो कविता के ख़त्म होने के बाद भी देर तक बना रहता है, जिसकी रोशनी में हमें कुछ क्षणों के लिए ही सही हमारे आसपास का संसार अनोखा जान पड़ने लगता है । इस कविता संग्रह की विशेष बात यह है कि इसमें एक ही कवि की चार तरह की कविताएँ संगृहीत हैं। एक-दूसरे से अलग होते हुए भी ये कविताएँ कहीं गहरे स्तर पर एक ही कवि की रचनाएँ महसूस होती हैं पर एक ऐसी कवि की रचनाएँ जो नयी दिशाओं की खोज में रहती हैं। संग्रह की अन्तिम कविताएँ 'उदाहरण काव्य' प्राकृत- संस्कृत की कुछ जानी-मानी कविताओं के अनुवाद और पुनर्रचनाएँ हैं। इनमें से अधिकतर कविताओं में शृंगार रस उजास की तरह फैला है और इन्हें पढ़ते हुए हमारी संस्कृति में शृंगार रस की सहज व्याप्ति अनुभव होती है। इन अनुवादों और पुनर्रचनाओं में ये सारी प्राकृत-संस्कृत कविताएँ हमें आज की कविताएँ जान पड़ती हैं, मानो ये कवि सैकड़ों वर्षों के पार हमारे समय में आकर हिन्दी में कविताएँ लिख रहे हों।- उदयन वाजपेयी

संगीता गुन्देचा -कवि, कथाकार, निबन्धकार, अनुवादक और नाट्यशास्त्रज्ञ । जन्म : उज्जैन, मध्य प्रदेश ।पुस्तकें : एकान्त का मानचित्र (कविता-कहानियों का संग्रह, द्वितीय संस्करण 2022), उदाहरण काव्य (प्राकृत-संस्कृत कविताओं के हिन्दी अनुवाद), मटमैली स्मृति में प्रशान्त समुद्र (जापानी कवि शुन्तारो तानीकावा की कविताओं के हिन्दी अनुवाद), नाट्यदर्शन (कावालम् नारायण पणिक्कर, हबीब तनवीर और रतन थियाम से संवाद), कावालम् नारायण पणिक्कर : परम्परा एवं समकालीनता, भास का रंगमंच, समकालीन रंगकर्म में नाट्यशास्त्र की उपस्थिति, टोट बटोट उर्दू लेखक सूफी तबस्सुम की नज़्मों का सम्पादन ।अनुवाद : कृतियों के अनुवाद उर्दू, बांग्ला, मलयालम, अँग्रेज़ी, फ्रेंच और इतालवी में ।अध्येतावृत्तियाँ : भारत सरकार के संस्कृति मन्त्रालय की साहित्य की अध्येतावृत्ति । उच्च अध्ययन केन्द्र नान्त (फ्रांस) की अध्येतावृत्ति । पुरस्कार : 'भोज पुरस्कार', 'भास सम्मान', 'कावालम् नारायण पणिक्कर कला-साधना सम्मान', 'संस्कृत भूषण', 'कृष्ण बलदेव वैद फैलोशिप सम्मान’, ‘विशिष्ट महिला सम्मान ।'इन दिनों केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल में सहायक आचार्या । हिन्दी की कला, साहित्य और सभ्यता पर केन्द्रित पत्रिका 'समास' में सम्पादन सहयोग । भोपाल में रहती हैं।सम्पर्क : भोपाल (म.प्र.)★★★भज्जू सिंह श्याम -भज्जू सिंह श्याम परधान शैली के समकालीन चित्रकारों में अपनी प्रयोगधर्मिता के लिए विशेष रूप से विख्यात हैं । उन्होंने भारत और विदेशों में कई एकल प्रदर्शनियाँ की हैं। आपके चित्रों की कई पुस्तकें हैं, जिनमें लन्दन जंगल बुक और विभिन्न लेखकों-कलाकारों के साथ चित्रों और रेखांकनों की पुस्तकों जैसे गीता वोल्फ़ के साथ क्रिएशन, शिरीष राव के साथ देट्स हाउ आय सी थिंग्स, कोदाई मत्सुओका के साथ ओरिजिन्स ऑफ आर्टस, एण्ड्रिया अनास्तासियो और गीता वोल्फ के साथ अलोन इन द फॉरेस्ट और जोनाथन यामाकामी और गीता वोल्फ के साथ सम्पादित पुस्तक सिग्नेचर शामिल हैं, हिन्दी लेखक उदयन वाजपेयी के साथ आपकी पेड़ और परछाईं पुस्तक शीघ्र प्रकाश्य है । भारत सरकार ने वर्ष 2018 में इन्हें पद्मश्री प्रदान किया है। भोपाल में रहते हैं ।

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