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Patna Diary

by Nivedita
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789390678372
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 118
  • Original Price: INR 299.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): Memoirs

प्रख्यात कवि और अग्रणी संघर्षशील कार्यकर्ता निवेदिता जी के लेखों का यह संग्रह बीसवीं शताब्दी के अस्सी के दशक के पटना शहर और विस्तार में पूरे देश के जीवन का जीवन्त और मार्मिक दस्तावेज़ है। यह रोज़नामचा भी है और दास्तान भी और अपने स्वभाव में मार्मिक कविता। किसी शहर या कालखण्ड को कितने-कितने कोणों और सन्दर्भो से देखा जाये कि टुकड़ों-टुकड़ों में भी शहर की मुकम्मिल तस्वीर निकल आये-इसकी नायाब मिसाल निवेदिता जी की यह किताब है। अस्सी का वो दशक जन संघर्षों, नये बदलावों और गहरे रोमान से भरा हुआ था। ज़िन्दगी को बेहतर बनाने की ख्वाहिशें, सपने और लड़ाइयाँ अभी भी नौजवानों की ज़िन्दगी का हिस्सा थीं और पटना शहर अनेक परिवर्तनकामी विचारों और आन्दोलनों से उद्वेलित था। निवेदिता जी ने अपने आदर्श नायकों और उनके लेखन, कर्म, संघर्षों को केन्द्र में रखकर उस हीरक समय का एक बहुरंगी मानचित्र प्रस्तुत किया है। उनकी भाषा उस समय के सत्त और सत्य को बहुत तीक्ष्णता से आयत्त करती है। इस पुस्तक का पहला ही लेख महान क्रान्तिकारी कवि आलोक धन्वा की युगान्तरकारी कविता के मोहक वृत्तान्त से शुरू होता है जो पूरे संग्रह के महत्त्व को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है।ऐसी पुस्तकों की ज़रूरत हमेशा रहेगी जो विधिवत इतिहास-लेखन या पत्रकारिता न होते हुए भी इतिहास के एक दौर को साहित्य, कला, वैचारिकी और जन-संघर्षों की मार्फत समझने की कोशिश करती हैं और अँधेरों में भी भासमान द्वीपों का अन्वेषण करती हैं।आशा है कि निवेदिता जी की यह पुस्तक अपने अनूठे कलेवर और विन्यास के कारण सहृदय पाठकों का ध्यान एवं आदर अर्जित करेगी।- अरुण कमल

निवेदितालेखक, कवि, वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता । लम्बे समय तक पत्रकारिता की। इनकी कहानियाँ, कविताएँ कई पत्र-पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित हुईं। कविता की दो किताब वाणी प्रकाशन से प्रकाशित- ज़ख़्म जितने थे, प्रेम में डर । अब के बसन्त, कहानी संकलन का प्रकाशन। लगभग सभी राष्ट्रीय अख़बारों में काम किया। नवभारत टाइम्स से शुरुआत ।लाडली मीडिया अवॉर्ड मिला सर्वश्रेष्ठ हिन्दी पत्रकारिता के लिए। मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम के मामले को लेकर लम्बी लड़ाई। अदालत से लेकर सड़कों तक। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इनके द्वारा दायर याचिका के आधार पर न्याय मिला । गया, बिहार में जन्मी निवेदिता अब पटना में रहती हैं।

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