Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Prem Mein Dar

by Nivedita
Save 32% Save 32%
Current price ₹102.00
Original price ₹150.00
Original price ₹150.00
Original price ₹150.00
(-32%)
₹102.00
Current price ₹102.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789387409644
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 124
  • Original Price: INR 150.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 150 grams
  • BISAC Subject(s): Essays

हाल के बरसों में जिन कवियों ने अपनी प्रतिभा और काव्य-आचरण से समस्त हिन्दी पाठक समुदाय को सम्मोहित और चमत्कृत किया है, उनमें निवेदिता जी अग्रणी हैं।रोज़मर्रा के सुख-दुख से लेकर पूरे देश और संसार की ज्वलन्त समस्याओं पर जिस शिद्दत और त्वरा से निवेदिता ने लिखा है, वह विरल है। ये कविताएँ गहरे अर्थों में राजनीतिक हैं क्योंकि यहाँ राजनीति सीधे-सीधे मनुष्य की नियति से जुड़ी है। फिर भी निवेदिता की कविताएँ कभी भी अतिमुखर या वाचाल नहीं होतीं। अपने समय के ज़ख़्मों की शिनाख्त करती ये कविताएँ प्रेम के पक्ष में अडिग खड़ी होती हैं और इस तरह वर्तमान अँधेरे का एक प्रकाश-प्रतिपक्ष रचती हैं।निवेदिता जी निपुण कलाकार हैं। नये बिम्बों के साथ यहाँ भाषा का एक नया संस्कार है जो कविताओं को कसाव तथा दृढ़ता प्रदान करता है। यह दूसरा संग्रह भी पहले संग्रह की ही तरह सहृदय पाठकों का कण्ठाभरण बनेगा, ऐसी आशा है।-अरुण कमलप्रेम एक आग है। आग ऊर्जा का मूल है। हर प्रकार की भूख को शमन करने की शक्ति देती है आग । निवेदिता के हृदय में पूरी त्वरा से जलती है यह आग जो एक साथ अन्याय से, भूख से लड़ना सिखाती है और प्रेम करना सिखाती है । निवेदिता की प्रेम-कविताएँ व्यक्तिगत न होकर सार्वभौमिक हो जाती हैं। जब वह चाँद, रातों में उतरता है भीतर, फैल जाता है सृष्टि के अन्तिम छोर तक करने को प्यार बार-बार ।निवेदिता की कविताओं में जीवन है, गति है, लय है और है अकूत जिजीविषा ! ऐलान के बहाने रोज़-ब-रोज़, युद्ध, क्षुद्र स्वार्थ और घृणित मंशा के साथ हलाक़ होते नौनिहालों को स्वर्ग से खींच लाने की ज़िद है। कविताएँ पढ़ते हुए सहसा ये कहने का जी करता है कि ज़िन्दगी कितनी भी बुरी क्यों न हो, मौत से बेहतर है।- पद्मश्री उषाकिरण खान

निवेदिता4 अप्रैल 1965 में बिहार के गया में जन्मी निवेदिता ने अपने सफ़र की और छात्र आन्दोलन से की। पटना विश्वविद्यालय से राजनीतिशास्त्र में एम.ए. किया। शुरुआत रंगमंच माँ इन्दु रानी झा, पिता नीतिरंजन झा की पहली सन्तान । पत्रकारिता का लम्बा अनुभव। विभिन्न अख़बारों नवभारत टाइम्स, आज, राष्ट्रीय सहारा, नई दुनिया में कई वर्षों तक काम किया। अभी स्वतन्त्र पत्रकार के रूप में दिल्ली, पटना से प्रकाशित होने वाले दर्जनों पत्र-पत्रिकाओं में लेखन का काम जारी। फिलहाल ग्रीन पीस इंडिया में मीडिया कंसलटेंट के रूप में कार्यरत ।अवार्ड : महिला मुद्दों पर बेहतरीन पत्रकारिता के लिए उन्हें 2010-11 का लाडली मीडिया अवार्ड एवं वन वर्ल्ड अक्षयपात्र मीडिया अवार्ड 2012 मिला।फेलोशिप : नेशनल फाउंडेशन ने 1997 में बच्चों की स्थिति पर काम करने के लिए मीडिया फेलोशिप दिया। यूएनएफपीए के तहत विजनरी लीडरशिप फेलोशिप 2004 में मिला।प्रकाशन : वाणी प्रकाशन से कविता की पहली पुस्तक 'जख्म जितने थे' प्रकाशित; हंस, पाखी, कथादेश में कई कविताएँ और कहानियाँ प्रकाशित। बालिका शोषण की अनकही कहानी- 1999 में बुक फॉर चेन द्वारा प्रकाशित। पटना में रह रही निवेदिता से - niveditashakeel@gmial.com पर सम्पर्क करें।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us