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Rachna Ka Paksh

by Nand Kishore Naval
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350720530
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 187
  • Original Price: INR 175.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): General

रचना का पक्ष - 'रचना का पक्ष' हिन्दी के सुपरिचित आलोचक नंदकिशोर नवल के लेखों का छठा संग्रह है। उनके स्फुट लेख भी उनके योजनाबद्ध लेखन की तरह महत्त्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि उनकी एक प्रासंगिकता होती है। इसका प्रमाण इस पुस्तक में शिवपूजन सहाय और राहुल सांकृत्यायन पर लिखे गए लेख ही नहीं हैं, निराला और मुक्तिबोध की कविताओं की उनके द्वारा की गयी पाठाधारित व्याख्या भी है। पुस्तक की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण सामग्री इसके परिशिष्ट में दिया गया आधुनिक हिन्दी कविता के इतिहास का प्रारूप है। अब तक साहित्य में इतिहास-दर्शन की ही चर्चा होती रही है। नवल द्वारा प्रस्तुत किया गया प्रारूप उनका इतिहास-लेखन की दिशा में उठाया गया पहला क़दम है।हिन्दी आलोचना दिन-प्रतिदिन अगम्भीर होती जा रही है। दूसरी तरफ़ उसमें जिस भाषा का प्रयोग किया जा रहा है, उससे लगता है कि वह पहली बार सयानी हो रही है! जहाँ तक मार्क्सवादी आलोचना की बात है, अनेक मार्क्सवादी आलोचक चुप हो चुके हैं और जो बचे हुए हैं, वे जगद्गति से अप्रभावित अपनी लाइन पर चले जा रहे हैं। ऐसे में आलोचना में जो कुछ सार्थक स्वर हैं, उनमें निस्सन्देह एक स्वर नवल का है-उठता, गिरता, नयी स्थितियों से टकराता, अपने को जाँचता, सुधारता और आगे बढ़ता।

नंदकिशोर नवल - जन्म : 2 सितम्बर, 1937 (चाँदपुरा, वैशाली) शिक्षा : एम.ए., पीएच.डी. (पटना विश्वविद्यालय,पटना); शोध-प्रबन्ध : 'निराला का काव्य विकास'वृत्ति : अध्यापन (पटना विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के भूतपूर्व युनिवर्सिटी प्रोफ़ेसर)आलोचनात्मक कृतियाँ :1. कविता की मुक्ति; 2. हिन्दी आलोचना का विकास; 3. प्रेमचन्द का सौन्दर्यशास्त्र; 4. महावीरप्रसाद द्विवेदी; 5. शब्द जहाँ सक्रिय हैं; 6. यथाप्रसंग; 7. मुक्तिबोध : ज्ञान और संवेदना; 8. निराला और मुक्तिबोध : चार लम्बी कविताएँ; 9. समकालीन काव्य-यात्रा; 10. दृश्यालेख; 11. मुक्तिबोध; 12. निराला : कृति से साक्षात्कार (दो खण्ड)सम्पादित :1. असंकलित कविताएँ : निराला; 2. निराला रचनावली (आठ खण्ड); 3. रुद्र समग्र 4. हर अक्षर है टुकड़ा दिल का (रामगोपाल शर्मा 'रुद्र' की प्रतिनिधि कविताओं का संकलन);5. काव्य समग्र : रामजीवन शर्मा 'जीवन'; 6. अँधेरे में ध्वनियों के बुलबुले (वैशाली जनपद के कवियों की कविताओं का संकलन); 7. रामावतार शर्मा : प्रतिनिधि संकलन।त्रैमासिक 'आलोचना' से सह-सम्पादक के रूप में पाँच वर्षों (1981-85) तक सम्बद्ध। फिलहाल 'कसौटी' के सम्पादक।

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