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Roop Singh Chandel Ki Lokpriya Kahaniyan

by Roopsingh Chandel
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Book cover type: PaperBack
  • ISBN13: 9789390900787
  • Binding: PaperBack
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 168
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): General

वरिष्ठ कथाकार रूपसिंह चंदेल बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। कहानी, उपन्यास, संस्मरण, आलोचना आदि गद्य की अनेक विधाओं में उन्होंने सृजन किया है। आलोचकों ने उन्हें लोकधर्मी कथाकार कहा है। युवा आलोचक डॉ. बिभा कुमारी के अनुसार, कथाकार रूपसिंह चंदेल की कथाओं में एक ओर मिट्टी की सोंधी खुशबू की अनुभूति प्राप्त होती है तो दूसरी ओर महानगरीय जीवन, टूटते संबंध, मशीनी जीवन, मनुष्य द्वारा मनुष्य का उपयोग किया जाना इत्यादि विसंगतियों का जीवंत और साक्षात् चित्रण है। वरिष्ठ आलोचक डॉ. पंकज साहा के अनुसार, विश्व के महान् लेखक अल्बेयर कामू के लेखन में हिंसा, अत्याचार एवं क्रूरता के खिलाफ जो स्वर हैं, वही स्वर चंदेलजी की रचनाओं में भी देखने को मिलते हैं। कामू की तरह चंदेलजी की भी सृजनात्मक पारदर्शिता अपने समय की मानवीय चेतना एवं उसकी समस्याओं का उद्घाटन करती है। युवा आलोचक उमाशंकर सिंह परमार मानते हैं कि रूपसिंह चंदेल अपनी कहानियों में जब यथार्थ का चित्र प्रस्तुत करते हैं, तब वे कतई आदर्शवादी नहीं रहते हैं, न ही वे सच को छिपानेवाले आदर्श से सम्मोहित हैं। यथार्थ यहाँ कटु यथार्थ के रूप में आता है और वह पाठक को झकझोरते हुए झूठी मान-मर्यादा, नैतिक पतन, मूल्यहीनता और शोषण में संलग्न लोकतंत्र के प्रहरियों पर प्रहार करता है।

रूपसिंह चंदेल12 मार्च, 1951 को कानपुर जनपद के गाँव नौगवाँ गौतम में जनमे रूपसिंह चंदेल की अब तक 68 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 15 उपन्यास, 15 कहानी-संग्रह, संस्मरण की 4 पुस्तकें, 3 किशोर उपन्यास, 10 बाल-कहानी-संग्रह, आलोचना की 4 पुस्तकों सहित यात्रा-संस्मरण, साक्षात्कार, दोस्तोएव्स्की की जीवनी, लियो टॉलस्टॉय का अंतिम उपन्यास ‘हाजी मुराद’, टॉलस्टॉय पर 30 संस्मरण और हेनरी त्रायत लिखित टॉलस्टॉय की जीवनी का अनुवाद सम्मिलित हैं। उनके साहित्य पर डॉ. माधव सक्सेना अरविंद, माधव नागदा और शशि कांडपाल ने आलोचनात्मक पुस्तकों का संपादन किया है। अब तक उनके 10 उपन्यासों का मराठी भाषा में तथा 3 उपन्यासों का कन्नड़ में अनुवाद हो चुका है। उनकी अन्य रचनाओं के अनुवाद पंजाबी, अंग्रेजी तथा गुजराती भाषाओं में भी हुए हैं। उनके साहित्य पर 24 छात्र पी-एच.डी. और एम.फिल. कर चुके हैं।उन्हें हिंदी अकादमी, दिल्ली से 1990 और 2000 में, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से 1994 में और 2013 में आचार्य निरंजननाथ सम्मान (राज.) से सम्मानित किया गया।

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