Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Rukhsat Karo Mujhe

by Munawwar Rana
Save 32% Save 32%
Current price ₹202.00
Original price ₹299.00
Original price ₹299.00
Original price ₹299.00
(-32%)
₹202.00
Current price ₹202.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789387409088
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 196
  • Original Price: INR 299.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 3rd Edition
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): General

मुनव्वर राना हमारे उत्तर-आधुनिक समय के बेहद प्रयोगधर्मी और लोकप्रिय शायर हैं। नये समाज के नये जीवन-मूल्यों और विडम्बनाओं को उन्होंने अपनी शायरी के साथ से देखा और शिद्दत से महसूस कराया। उन्होंने न सिर्फ साफ़-शफ़्फ़ाक शे'र कहे बल्कि ग़ज़ल को आभिजात्यता से मुक्त कराया और उसे जनसाधारण की सिन्फ़ (विधा) बनाने में कामयाब हुए। उन्होंने ग़ज़लगोई के लिए नायाब शैली विकसित की और इसी शैली के ज़रिए अश्आर में अनूठा ‘स्पार्क' पैदा किया। मुनव्वर राना की ग़ज़लों में एक गूँज-सी महसूस होती है। यह गूँज, दरहक़ीक़त, हिन्दुस्तान की जो गंगा-जमुनी तहज़ीब है, उसी से छनकर आती है। उर्दू ग़ज़ल में जब ‘प्रेमिका' एक विशिष्ट किरदार के रूप में अहमियत हासिल कर रही थी, मुनव्वर राना माँ की संवेदना को बड़ी सादगी, जज़्बे और एहतराम के साथ व्यक्त करने लगे। यह एक अदबी घटना थी, जिसका हार्दिकता से स्वागत हुआ। मुनव्वर राना की तख़्लीक का हासिल यह है कि वो जितना आसान कहते हैं, 'बात' उतनी ज्यादा असरज़दा होती है। मनव्वर राना की शायरी कई-कई दुनियाओं की शायरी है।

मुनव्वर राना -जन्म : 26 नवम्बर 1952 को रायबरेली, उत्तर प्रदेश में।शिक्षा : बी. कॉम ।पुस्तकें : ग़ज़ल गाँव, पीपल छाँव, मोर पाँव,अकेला हो गया, माँ, बदन सराय, सुख़न सराय, मुहाजिरनामा, शहदाबा तथा मुनव्वर राना की सौ ग़ज़लें (सभी शायरी की पुस्तकें); मीर आ के लौट गया (आत्मकथा); बगैर नक़्शे का मकान, सफ़ेद जंगली कबूतर, फुन्नकताल तथा ढलान से उतरते हुए (सभी संस्मरण पुस्तकें) ।कई पुस्तकों का बाँग्ला तथा अन्य भाषाओं में अनुवाद ।देश-विदेश की अनेक साहित्यिक यात्राएँ।सम्पर्क : 10-सी, बोलाई दत्त स्ट्रीट, कोलकाता-700073देहावसान : 14 जनवरी 2024

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us