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Safal Chhatra Jeevan Ke 15 Gurumantra

by Kunwar Kanak Singh Rao
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789355213075
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 184
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): Fantasy / Collections & Anthologies

सफल होने के लिए क्‍या चाहिए? | सकारात्मक सोच? बिल्कुल सही।लेकिन सिर्फ सकारात्मक सोच से काम नहीं चलता। तो और क्या चाहिए ?सफलता के लिए कार्य जरूरी है और कार्य को सही ढंग से करने के लिए कौशल की जरूरत होती है। कुछ कौशल ऐसे होते हैं, जो हमें स्कूल में सीखने को मिलते हैं; कुछ कौशल हम कार्य के दौरान कार्यस्थल पर सीखते हैं और कुछ अन्य कौशल हैं, जो हम जीवन के सामान्य अनुभवों से सीखते हैं।यह पुस्तक अदम्य मानवीय इच्छाशक्ति का एक टेस्टामेंट है। सीखने व पढ़ने के लिए एक स्वाभाविक शैली अपनाकर चलना बहुत महत्त्वपूर्ण होता है; क्योंकि इससे आपको पता चलता है कि कब, कहाँ और कैसे पढ़ने से वांछित परिणाम प्राप्त हो सकता है। हम चैंपियन बन सकते हैं; अगर पहले से चैंपियन हैं तो और बेहतर चैंपियन बन सकते हैं। वह कौन सी बात होती है, जो एक चेंपियन को अन्य सामान्य लोगों से अलग करती है ? क्या उसका अनुशासन और प्रतिबद्धता ?शायद यह उसकी एकनिष्ठा होती है, जो उसे पूर्णता तक पहुँचे बिना रुकने नहीं देती। आप भी एक दिन संपूर्ण चैंपियन बन सकते हैं। अपने दीर्घ अनुभव के आधार पर विद्दान्‌ लेखक ने छात्रों के विकास और प्रगति में आनेवाली कठिनाइयों को समझा है और उन्हें दूर कर सफलता पाने के व्यावहारिक गुसुमंत्रों को इस पुस्तक में प्रस्तुत किया है। छात्रों के लिए प्रेक्टिकल हैंडबुक।

कुँवर कनक सिंह राव वर्तमान समय में शिक्षा क्षेत्र के शिरोमणि, योग्य, कर्मठ लेखक एवं शिक्षक कुँवर कनक सिंह राव का जन्म राजस्थान के कांठल, प्रतापगढ़ के पास ठिकाना 'ढलमू ' में हुआ था।मात्र 14 वर्ष की उम्र में ही वह 'कुँवर क्रांति' के नाम से साहित्य जगत्‌ में प्रसिद्ध हो गए और शीघ्र ही अखिल भारतीय कवि के रूप में ख्याति अर्जित की । राष्ट्रीय मंच पर उन्होंने वीर रस के कवि के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त की और आशावादी काव्य पाठ कर पाठकों का मन हरते रहे।साहित्य क्षेत्र के साथ ही वे कालांतर में शैक्षणिक क्षेत्र में भी एक दैदीप्यमान नक्षत्र की भाँति अपनी चमक बिखेरते हुए उदित हुए और स्थापित हो गए। 1997 में बी.एड. करने के पश्चात्‌ वर्ष 1997-98 में रेलवे स्टेशन मास्टर परीक्षा में चयनित हुए। 1998 में राज्य पुलिस उप निरीक्षक परीक्षा उत्तीर्ण की तथा 1999 में ए.ई.सी.एस में। प्रारंभ में टी.जी.टी के रूप में तथा सन्‌ 2000 में इतिहास के प्राध्यापक के रूप में अध्यापन कार्य किया। राजस्थान के युवाओं के मध्य शीघ्र ही उन्होंने इतिहास के अध्यापक के रूप में एक अविस्मरणीय स्थान बनाया जो आज भी यथावत है। इ-मेल : kunwarkanak9@gmail.com

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