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Sangrang : Nai Peedhi Ke 25 Rangkarmiyon Ki Rachana-Prakriya

by Ed. Hrishikesh Sulabh
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789395737302
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Rajkamal Prakashan
  • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 216
  • Original Price: INR 299.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 212 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

मंच पर उतरने से पहले अभिनेता किस भीतरी संघर्ष से गुजरता है; दिये गए चरित्र के साथ अपनी खुद की पहचान को एकलय करने में उसे नाटक के पाठ के साथ-साथ खुद को भी कितना पढ़ना-खँगालना पड़ता है; कितनी मदद उसे अपने अब तक के जिये जीवन से मिलती है, और कितनी अभिनेता के रूप में प्राप्त प्रशिक्षण से; और कैसे एक पात्र को जीना समाज में उसकी अपनी गति को प्रभावित करता है, इन सवालों पर आम दर्शक कभी नहीं सोचता।

ये चीजें आम तौर पर सामने भी नहीं आ पातीं क्योंकि अ‌‌भिनेता न कभी इस बारे में कहीं लिखते हैं, न कोई उनसे पूछता है। यह उस मंच का किंचित् अदृश्य कोना है जिस पर हमने जीवन की नाटकीयताओं के जरिये अपने अस्तित्व के कई अँधेरे-अदेखे पहलुओं को देखा-जाना है।

यह किताब ‌इस दिशा में एक बड़ी, और गम्भीर पहलकदमी है।

हिन्दी में पहली बार मंच पर सक्रिय युवा अभिनेता और अभ‌िनेत्रियाँ यहाँ अपने ऐसे अनुभवों को साझा कर रहे हैं जो खुद उनके लिए भी गहरी अन्तर्यात्राओं की तरह रहे। इन्हें पढ़कर मालूम होता है कि जिसे हम ‘एक्टिंग’ कहकर आगे बढ़ जाते हैं, वह ‘एक्टर’ के लिए उसके अस्तित्व-बोध के स्तर पर घटित होनेवाला कितना बड़ा संघर्ष होता है; व्यक्तित्वान्तरण की वह प्रक्रिया उन्हें कितना मुक्त करती है, और कितना कसती है।

और यह हम पढ़ते हैं एक सजीव, धड़कते हुए, अत्यन्त ईमानदार गद्य के रूप में जिसे वही सम्भव कर पाता है जो अनुभव के कंटकाकीर्ण पथ पर नंगे पैर और खुली आँखों चला हो, जो प्रक्रिया का भोक्ता भी रहा हो और साक्षी भी।

अभिनय-जीवन के इन संस्मरणों को पढ़कर हम रंग-दर्शक के रूप में समृद्ध होते हैं। अभिनय के विद्यार्थियों के लिए तो इनसे गुजरना किसी ‘वर्कशॉप’ में होने जैसा है।

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