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Sham Hone Wali Hai

by Shahryar
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789352291694
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 112
  • Original Price: INR 225.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 150 grams
  • BISAC Subject(s): General

बात कुछ यों है... दूरियाँ कुर्ब लगें, कुर्ब में दूरी निकले उम्र भर मुझको यही कारे-अजब करना है। कविता कुछ और करे या न करे, वह अक्सर भाषा को वहाँ ले जाती है जहाँ वह पहले न गयी हो। यह नयी और अप्रत्याशित जगह हमारे सामने ख़ुद हमें और दुनिया से हमारे रिश्ते को उजागर करती है। कविता अपने आस-पास, सचाई में हमारी शिरकत और उनकी समझ बढ़ाती है। हम कुछ ज़्यादा ध्यान से सुनते, कुछ ज़्यादा तफ़सील में देखते, कुछ ज़्यादा शिद्दत से महसूस करते हैं। कविता हमें जताती है कि दुनिया हमें पूरी तरह से बनी-बनायी नहीं मिली है, उसे कुछ हम भी रचते-बनाते हैं। यह भी कि दुनिया ठोस तो है लेकिन सपनों, यादों, चाहतों, उम्मीदों, नाउम्मीदी वगैरह से भी मालामाल है। कविता और साहित्य वे विधाएँ हैं जो लगातार अपने सच पर शक करती हैं। इसीलिए अक्सर शेख या पण्डित कवि नहीं होते। उर्दू कवि शहरयार की कविता में वे सारे गुण और पहलू हैं जिनका ज़िक्र ऊपर है। दूर को पास लाने और पास को दूर ले जाने की हिकमत उन्हें खूब आती है। उनकी कविता बड़े सवाल पूछती है मगर उनका हौआ नहीं खड़ा करती : अब एक हम हैं, हमारे तवील साये हैं। कोई बताओ कि दुनिया में पेश्तर क्या था। अब जिधर देखिये लगता है कि इस दुनिया में कहीं कुछ चीज़ ज़्यादा है कहीं कुछ कम है

जन्म : 16 जून 1936 में आंवला जिला बरेली (उ.प्र.) में। शहरयार उर्दू के प्रतिष्ठित शायर हैं। उनका नाम हिन्दी पाठकों में भी आदर के साथ लिया जाता है। वाणी प्रकाशन ने इस काव्य संग्रह से पूर्व 'कहीं कुछ कम है' के नाम से उनका एक काव्य संग्रह प्रकाशित किया था, जिसे हमारे हिन्दी पाठकों ने बहुत सराहा। पाठकों की रुचि को धयान में रखते हुए हम उनका दूसरा संग्रह प्रकाशित कर रहे हैं। इस संग्रह में शयार की अब तक की सभी नई और कुछ पुरानी रचनाएं प्रस्तुत की जा रही हैं। इस काव्य संग्रह में शामिल रचनाओं द्वारा हमें शहयार के बुनियादी सरोकारों से साक्षात्कार होता है। जिन बातों को हम वास्तविक और जिन चीजों को बहुमूल्य समझते हैं, शहरयार की शायरी उनका इन्कार करती है। उनकी पैनी दृष्टि पर्दे के पीछे के भयावह दृश्य को भी देख लेती है जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते। इस संग्रह की शायरी मानवीय मूल्यों, सामाजिक संदर्भो और जीवन के प्रति अगाधा प्रेम की शायरी है। यह शायरी उपभोक्तावादी संस्कृति से होने वाले जीवन मूल्यों में निरन्तर हास की त्रासदी की शायरी है। हम आशा करते हैं कि शहरयार का यह काव्य संग्रह हमारे पाठकों के लिए प्रेरणा का स्रोत सिद्ध होगा। उत्कृष्ट साहित्य सेवा पर साहित्य अकादमी पुरस्कार के अतिरिक्त उर्दू अकादमी लखनऊ से पुरस्कृत और भी अनेकों पुरस्कार। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय उर्दू विभाग के प्रोफेसर तथा विभागाध्यक्ष पद से 1996 ई. में कार्यमुक्त हुए। फिलहाल जनवादी लेखक संघ की अलीगढ़ इकाई के अधयक्ष तथा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और शायर।

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