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Soundaryashastra Ke Prashn

by Ajay Tiwari
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789352290260
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 136
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): General

सौन्दर्यशास्त्र के प्रश्न - अजय तिवारी की यह किताब 'सौन्दर्यशास्त्र के प्रश्न' हिन्दी की प्रगतिशील कविता को पूरी काव्य परम्परा के सन्दर्भ में समझने की कोशिश करती है। उसका स्पष्ट मत है कि प्रगतिवाद जिन नये मूल्यों के साथ एक ऐतिहासिक आन्दोलन के रूप में सामने आता है वे सारे मूल्य पूर्ववर्ती भारतीय कविता में भी देखे जा सकते हैं। इस कविता की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि इसने पहले की कविता के जिन मानवतावादी मूल्यों और अन्तर्वस्तु को धारण किया है, उसे आधुनिक युग की वैज्ञानिक दृष्टि से लैस कर दिया है। अजय तिवारी मानते हैं कि प्रगतिशील साहित्य भारतीय साहित्य की समस्त मानवतावादी परम्पराओं से विकसित सुसंगत, वैज्ञानिक चेतना का साहित्य है।इस किताब का विशेष महत्त्व इस बात में है कि यह वस्तुतः प्रगतिशील कविता के सौन्दर्य-मूल्यों का अध्ययन भी है और क्रिटीक भी। इसलिए यह प्रगतिशील कविता के सौन्दर्य बोध और वैज्ञानिक सौन्दर्यशास्त्र के सम्बन्ध में आलोचना के क्षेत्र में व्याप्त अनेक भ्रांतियों का निराकरण करने का काम भी करती है।अजय तिवारी हमेशा, चाहे मुद्दा साहित्य का हो, साहित्यिक सैद्धान्तिकी का या संस्कृति के किसी पक्ष का, निरन्तर जिरह करते आलोचक हैं। तर्क-वितर्क करते एक सजग और सतर्क आलोचक। उनकी यह किताब केवल प्रगतिशील कविता के सौन्दर्य-मूल्यों और सौन्दर्य बोध को समझने के लिए ही सहायक नहीं है, यह वस्तुतः सौन्दर्य बोध और सौन्दर्य-मूल्यों की भारतीय परम्परा को समझने की भी एक सही दृष्टि प्रदान करती है।-राजेश जोशी

अजय तिवारी - जन्म : 6 मई, 1955, इलाहाबाद पैतृक आवास : जगजीवन पट्टी, जौनपुरशिक्षा : राधारमण इंटर कॉलेज, दारागंज, इलाहाबाद से 1970 में हाईस्कूल के बाद एम.ए. (हिन्दी) और पीएच.डी. तक उच्चशिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से। प्रकाशन : नागार्जुन की कविता, कुलीनतावाद और समकालीन कविता; साहित्य का वर्तमान पश्चिम का काव्य-विचार; आलोचना और संस्कृति, राजनीति और संस्कृति व्यवस्था का आत्मसंघर्ष आधुनिकता पर पुनर्विचार; शिल्प और समाज; हिन्दी कविता : आधी शताब्दी; हिन्दी कविता : सांस्कृतिक और साहित्यिक प्रक्रिया; उत्तरआधुनिकता; कुलीनतावाद और समकालीन कविता; केदारनाथ अग्रवाल (साहित्य अकादेमी)।सम्पादन : कवि-मित्रों से दूर (केदारनाथ अग्रवाल से संवाद), केदारनाथ अग्रवाल (आलोचना), आज के सवाल और मार्क्सवाद (रामविलास शर्मा के संवाद), तुलसीदास पुनर्मूल्यांकन, जन-इतिहास का नज़रिया, रामविलास शर्मा : निबन्ध।प्रकाश्य : जनवाद की समस्या और साहित्य, निराला : अनुभव और रूपगठन, रामविलास शर्मा के सरोकार। सम्मान : केशव स्मृति सम्मान (भिलाई), देवीशंकर अवस्थी सम्मान (दिल्ली), भगवत शरण उपाध्यायसम्मान (बलिया)।

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