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Surajmukhi Ke Kheton Tak

by Ekant Shrivatava
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789362874214
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 144
  • Original Price: INR 325.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

एकान्त श्रीवास्तव उन थोड़े-से कवियों में हैं जिनके बिना आज की हिन्दी कविता का मानचित्र पूरा नहीं होता ।पिछली शताब्दी की नवीं दहाई में जिन कवियों ने हिन्दी कविता को नयी लोक - ऊर्जा से आविष्ट कर दिया, उनमें एकान्त अग्रगण्य हैं। एक-दो अपवादों को छोड़ दें तो एकान्त श्रीवास्तव सम्भवतः अकेले कवि हैं जिन्हें गाँव और लोकजीवन का चितेरा कहा जा सकता है। अगर हम उनके पिछले संग्रहों के नामों पर ध्यान दें तो यह सहज ही सत्यापित हो जाता है - अन्न, मिट्टी, बीज, नागकेसर, धरती और अब यह सूरजमुखी के खेतों तक जो स्वभावतः ही कृषक को, भारतीय गाँवों को और गाँव के घर को समर्पित हैं। एकान्त की कविता किसान, गाँव और खेतों की कविता है ।त्रिलोचन और केदारनाथ अग्रवाल की याद दिलाती यह कविता अभी के काव्य- परिदृश्य में बिल्कुल पृथक् प्रतिसंसार रचने वाली कविता है जैसे आयरिश सीमस हीनी या अमेरिकी कवयित्री ग्लिक की कविता। यह प्रचलन से भिन्न कोटि की कविता है जो कई बार मोहक, अन्तर्विरोध विहीन, सुषम और मासूम प्रतीत होती है । लेकिन ध्यान देने पर लगता है कि यह विकास की अवधारणा, असमानता और अन्याय की भर्त्सना करती हुई कविता है। पुराने गाँव, घर, कुटुम्ब, प्रेम, सौहार्द और सौन्दर्य के निरन्तर लुप्त होते जाने के अवसाद और उदासी से भरी हुई कविता है। ये गाँव और जीवन वही नहीं हैं जो बचपन की स्मृतियों में वास करते हैं। किसी भी समाज को मापने का एक तरीक़ा उसके ग्रामीण जीवन को मापना है । आज हमारे गाँव, हमारी प्रकृति, हमारे ग्रामीण और वन और आदिवासी जन महानगरों के उच्छिष्ट हैं । एकान्त की कविता इसी अन्याय और असमानता का प्रतिरोधी स्वर है और जो कुछ भी रागमय, ललित या प्राणमय है, उसका यशोगान है। आकस्मिक नहीं कि अनेक कविताएँ कुछ भूली हुई, पुरातन लयों की याद दिलाती हैं और माँ, पिता, बहन, भाई परिजन की स्मृति हमें आर्द्र कर देती है। इस अर्थ में एकान्त की कविता विचारशुष्क न होकर भावों के रस से भरी है ।एकान्त की कविताओं को पढ़ते हुए मैंने पाया कि ग़रीबों पर इतनी बड़ी संख्या में इतनी मार्मिक कविताएँ हाल के दिनों में बहुत कम लिखी गयी हैं । 'एक साड़ी में जीवन बिताने की तकनीक’, 'ढोलक बजाती लड़की', 'पुराने कपड़ों का बाज़ार’, ‘अनाज गोदाम के मार्ग से दाने चुनती स्त्रियाँ’, ‘गोंद इकट्ठा करने वाली बच्चियाँ', 'खँडहर में घर' ऐसी ही कुछ मर्मस्पर्शी कविताएँ हैं जो दैन्य को प्रगट करते हुए भी मनुष्य की गरिमा का सम्मान करती हैं। यह भी लगा कि एकान्त ने प्रकृति के सौन्दर्य को बिल्कुल नये, अछूते प्रसंगों, दृश्यों और चरित्रों से व्यक्त किया है। सौन्दर्य का यह प्रकार आज विरल है। 'लाल यह बादाम का वन’, ‘पक रहा है शहद', 'ततैया का घर', 'पैदल पुल', ‘वन में बारिश' इसके कुछ प्रमाण हैं । इसी के साथ यह भी जोड़ना ज़रूरी है कि किसान जीवन के कुछ बिम्ब शायद पहले कभी ऐसी तन्मयता से नहीं आये, जैसे- 'गुड़ाई करते समय’, ‘लुवाई के दिन', 'खेत सूने पड़ गये हैं' वग़ैरह। लेकिन जिन कविताओं में लोकजीवन का राग, जीवन की प्रगाढ़ता और बृहत्तर आशयों का सन्धान मिलता है, वे एकान्त के काव्य का शिखर मानी जा सकती हैं और साथ ही हमारी कविता की उपलब्धि भी । उदाहरण के लिए- 'फूल बुलाता जल के भीतर', 'मज़ार', 'इक़बाल अहमद और उनके पिता', 'नहीं आने के लिए कहकर', 'पत्थर की आँख', 'ओ काली चींटियो', 'साही', या ‘अधबना घर’। ये विलक्षण कविताएँ हैं। एकान्त श्रीवास्तव की और आज के समय की प्रतिनिधि कविताएँ। एकान्त की कविताएँ यह सिद्ध करती हैं कि एकान्त और उनके सहचर कवि आज भी हमारे अत्यन्त सशक्त स्वर हैं। नदी तो एक ही होती है, लेकिन उसके रास्ते, धाराएँ और शाखाएँ बहुत अलग-अलग । एकान्त श्रीवास्तव की कविता पाठकों को पुनः आश्वस्त करती है कि हिन्दी कविता के जलग्रहण क्षेत्र लगातार प्रशस्त हो रहे हैं । ये कविताएँ हमें आस्वाद और विश्लेषण की नयी प्रविधि आविष्कृत करने को विवश करती हैं सूरजमुखी के खेतों तक का रास्ता कठोर और बीहड़ है : वे रास्ते महान हैंजो पत्थरों से भरे हैंमगर जो हमेंसूरजमुखी के खेतों तक ले जाते हैंएकान्त की कविता भी सूरजमुखी का फूल है । धूप, जल, रंग और गन्ध से भरी हुई ।-अरुण कमल

एकान्त श्रीवास्तव -जन्म : 08 फ़रवरी 1964, जिला - रायपुर (छत्तीसगढ़ का एक क़स्बा छुरा)।शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी), एम.एड., पीएच.डी. ।कृतियाँ : अन्न है मेरे शब्द, मिट्टी से कहूँगा धन्यवाद, बीज से फूल तक, धरती अधखिला फूल है (कविता-संग्रह), नागकेसर का देश यह (लम्बी कविता), शेल्टर फ्रॉम दि रेन (अंग्रेज़ी में अनूदित कविताएँ), कवि ने कहा (चुनी हुई कविताएँ); मेरे दिन मेरे वर्ष (स्म ति-कथा); कविता का आत्मपक्ष, बढ़ई, कुम्हार और कवि, आधुनिक हिन्दी कविता और काव्यानुभूति (आलोचना); चल हंसा वा देश (यूरोप डायरी); पानी भीतर फूल, पंखुरी- पंखुरी प्रेम (उपन्यास), अँजोर (छत्तीसगढ़ी कविताएँ : हिन्दी अनुवाद सहित ), जितनी यह गाथा (कहानी-संग्रह); मेरे साक्षात्कार (इंटरव्यू)।पुरस्कार : प्रथम ‘शरद बिल्लौरे स्म ति कविता पुरस्कार', 'रामविलास शर्मा पुरस्कार', प्रथम 'ठाकुर प्रसाद स्म ति पुरस्कार’, ‘दुष्यन्त कुमार पुरस्कार', 'केदार सम्मान', 'डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा सम्मान', 'सूत्रा सम्मान', 'हेमन्त स्म ति कविता सम्मान', 'जगत ज्योति स्म ति पत्राकारिता सम्मान', 'वर्तमान साहित्य मेलखान सिंह सिसौदिया कविता पुरस्कार', 'वातायन (साउथ बैंक) कविता सम्मान' : लन्दन, 'शोभनाथ यादव सम्मान', ‘स जनगाथा सम्मानँ', 'स्पन्दन कविता पुरस्कार', 'बसन्त सम्मान', 'शमशेर सम्मान', भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता का ‘साहित्य सारस्वत सम्मान' आदि।अनुवाद : कविताएँ अंग्रेजी व कुछ भारतीय भाषाओं में अनूदित एवं लोर्का, नाज़िम हिकमत और कुछ दक्षिण अफ़्रीकी कवियों की कविताओं का अंग्रेज़ी से हिन्दी अनुवाद।सम्पादन : नौ वर्षों तक ‘वागर्थ' का सम्पादन।यात्रा : उज़्बेकिस्तान, इंग्लैंड, नीदरलैंड, बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, वैटिकन सिटी, ऑस्ट्रिया, स्विट् ज़रलैंड आदि देशों की यात्रााएँ।अन्य : देश के अनेक विद्यालयों-विश्वविद्यालयों के पाठ् यक्रम में रचनाएँ संकलित एवं रचनाकर्म पर शोध-कार्य। कवि-कर्म पर आलोचना पुस्तक 'एकान्त श्रीवास्तव की काव्य-चेतना' (साई नाथ उमाठे) और 'एकान्त श्रीवास्तव : व्यक्तित्व एवं औतित्व' (संगीता शिशिर यादव) प्रकाशित।

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