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Teen Gole (Manto Ab Tak-24)

by Saadat Hasan Manto
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789350723449
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 112
  • Original Price: INR 200.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 300 grams
  • BISAC Subject(s): General

मण्टो की अधिकांश कहानियों की प्रेरणा या उत्स, उसका यह एहसास है- अत्यन्त प्रामाणिक और सच्चा एहसास - कि इस सारे निज़ाम में कहीं कुछ बहुत गलत है- आधारभूत रूप से गलत और नाकाबिले बरदाश्त । वह अपनी सारी शक्ति के साथ दर्द और दुख और तकलीफ़ के सही मुकाम पर उँगली रखता है- कि यही उसके निकट, लेखन का उद्देश्य है। मण्टो की यह भावना एक गहरे नैतिक उत्तरदायित्व के एहसास से उपजती है। एक ऐसी व्यवस्था में रहते हुए, जो लगातार मानवीयता को कुचलती है, मण्टो निजी तौर पर, अपने समाज और अपने साथियों के प्रति खुद को उत्तरदायी समझता है और तकलीफ़ के सही मुकाम पर उँगली रखना, उसके नज़दीक, उसके मानवीय फ़र्ज़ की अदायगी है। इसीलिए वह बार-बार उन आधारभूत मसलों की तरफ़ मुड़ता है, जो सहज ज़िन्दगी के रास्ते में रुकावट बन कर खड़े हैं-राजनीति, साम्प्रदायिकता, झूठ, फ़रेब, स्वार्थ, भ्रष्टाचार, सरमायेदारी, शोषण ।अपने इसी नैतिक उत्तरदायित्व को महसूस करके, मण्टो हर तरह की साम्प्रदायिकता और फ़िरकेवाराना प्रवृत्ति से ऊपर उठकर उस 'गलती' पर पूरे जोर से आघात करता है, इसीलिए वह तथाकथित 'प्रगतिशील' लेखकों की जमात से कहीं ज़्यादा प्रगतिशील है। चूँकि वह किसी राजनीतिक दल या धार्मिक सम्प्रदाय से जुड़ा हुआ नहीं है इसीलिए वह चीजों को किसी पर्दे को आड़ से नहीं देखता और अपने अनुभवों तथा अपनी अनुभूतियों को सच के तीखेपन से खुली अभिव्यक्ति देता है।

सआदत हसन मंटो कहानीकार और लेखक थे। मंटो फ़िल्म और रेडियो पटकथा लेखक और पत्रकार भी थे। मंटो फ़िल्म और रेडियो पटकथा लेखक और पत्रकार भी थे। प्रसिद्ध कहानीकार मंटो का जन्म 11 मई 1912 को पुश्तैनी बैरिस्टरों के परिवार में हुआ था। उनके पिता ग़ुलाम हसन नामी बैरिस्टर और सेशन जज थे। उनकी माता का नाम सरदार बेगम था, और मंटो उन्हें बीबीजान कहते थे। सआदत हसन मंटो की गिनती ऐसे साहित्यकारों में की जाती है जिनकी कलम ने अपने वक़्त से आगे की ऐसी रचनाएँ लिख डालीं जिनकी गहराई को समझने की दुनिया आज भी कोशिश कर रही है। मंटो की कहानियों की बीते दशक में जितनी चर्चा हुई है उतनी शायद उर्दू और हिन्दी और शायद दुनिया के दूसरी भाषाओं के कहानीकारों की कम ही हुई है। आंतोन चेखव के बाद मंटो ही थे जिन्होंने अपनी कहानियों के दम पर अपनी जगह बना ली। मंटो साहित्य जगत के ऐसे लेखक थे जो अपनी लघु कहानियों के काफी चर्चित हुए। वाणी प्रकाशन से मंटो के पच्चीस कहानी-संग्रह प्रकाशित हैं – ‘रोज़ एक कहानी’, ‘एक प्रेम कहानी’, ‘शरीर और आत्मा’, ‘मेरठ की कैंची’, ‘दौ कौमें’, ‘टेटवाल का कुत्ता’, ‘सन 1919 की एक बात’, ‘मिस टीन वाला’, ‘गर्भ बीज’, ‘गुनहगार मंटो’, ‘शरीफन’, ‘सरकाण्डों के पीछे’, ‘राजो और मिस फ़रिया ‘, ‘फ़ोजा हराम दा’, ‘नया कानून’, ‘मीना बाज़ार’, ‘मैडम डिकॉस्टा’, ‘ख़ुदा की क़सम’, ‘जान मुहम्मद’, ‘गंजे फरिश्ते’, ‘बर्मी लड़की’, ‘बँटवारे के रेखाचित्र’, ‘बादशाह का खात्मा’, ‘तीन मोती औरतें’, ‘तीन गोले’। सआदत हसन मंटो उर्दू-हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय एवं महत्वपूर्ण कथाकार माने जाते हैं। उनकी लिखी हुई उर्दू-हिन्दी की कहानियाँ आज एक दस्तावेज बन गयी हैं।

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