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Teri Meri Kahani

by Vijay Mohan
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789380222394
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: GenNext Publication
  • Publisher Imprint: GenNext Publication
  • Publication Date:
  • Pages: 304
  • Original Price: INR 295.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 505 grams
  • BISAC Subject(s): General

तेरी मेरी कहानी संग्रह में हम सब की कोई ना कोई कहानी है। लेखक ने अपनी कहानियों का ख़ूबसूरत गुलदस्ता अपने पाठकों को पेश करने की कोशिश की है। जनून था जो रात-रात भर जागकर कहानियां लिखते रहे। कहानियाँ अपने शौक के लिए लिखते हंै। फिर उन्हांेने अपनी कहानियों को लोगों के साथ बंाटने की सोची और इस संग्रह का जन्म हुआ। इस संग्रह में आपको हर तरह की, जैसे प्यार, मोहब्बत, जि़ंदगी की हकीकत की, काल्पनिक और हालात को बदलने के बारे में कहानियाँ मिलेंगी। जनून था जो सपनांे में कहानियाँ और नज़्में दिखाई देती थीं। ऐसी ही एक कहानी ’तिकोण का चैथा कोण’ उनके सपने में आई। वो ख़ुद भी हैरान हैं कि ’तिकोण का चैथा कोण’ कहाँं से आ गया? ड्राईंग में थोड़ा कमज़ोर थे, शायद इसलिए समझ नहीं पाये, कि तिकोण का चैथा कोण तो होता ही नहीं। एक बार उनका चश्मा खो गया और उन्होंने पुबपा और उसके चश्में के बारे में कहानी लिख डाली। नवजात लड़कियों को मारे जाने पर ’मेरी आवाज़ सुनो’ जैसी दिल हिला देने वाली कहानी लिखी। आजकल के दंगो पर ’सोफि़या’- ’ऐ गर्ल फ़्र ाॅ म नार्थ-ईस्ट’ पर कहानी लिख डाली। पता चलता है कि कैसे दूसरे देश हमारी प्रगति को रोकना चाहते हैं। उनकी कहानी ’शोक सभा वरसिज शौख़ सभा’ एक हास्य कथा उनके व्यक्तिगत विचारों को दर्शाती है।

विजय मोहनः जन्म लायलपुर (पाकिस्तान) में हुआ। पिताजी पुलिस आफि़सर और माताजी एजुकेशनिस्ट थीं। पढ़ाई पठानकोट, शिमला और गुरदासपुर में की। कहानी और शायरी पढ़ने लिखने का शौक था। कालेज में बज़्में अदब उर्दू के पै्रजि़डेंट थे। आॅल इंडिया रेडियो जालंधर और जम्मू में भी प्रोग्राम दिये। जैन टी.वी. और साधना चैनल पर भी ’रेकी’ के बारे में प्रोग्राम दिये। फ़ौज और ठैथ् में सर्विस की और 1965 व 1971 की जंगो में हिस्सा लिया। आजकल कहानियाँ और शायरी के अलावा फि़ल्मों में भी रोल करते हैं।

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