Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Triveni

by Acharya Ramchandra Shukla
Save 35% Save 35%
Current price ₹147.00
Original price ₹225.00
Original price ₹225.00
Original price ₹225.00
(-35%)
₹147.00
Current price ₹147.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789352290659
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 104
  • Original Price: INR 225.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): General

त्रिवेणी' आचार्य रामचंद्र शुक्ल के तीन आलोचनात्मक निबंधों का संग्रह है। वे निबंध हैं : 1. मलिक मुहम्मद जायसी, 2. महाकवि सूरदास तथा 3. गोस्वामी तुलसीदास आचार्य शुक्ल हिंदी के अप्रतिम साहित्य-चिंतक, आलोचक, निबंधकार और साहित्य के इतिहास लेखक के रूप में ख्यात हैं। वे कुशल अनुवादक भी थे। उन्होंने हिंदी साहित्य के विश्लेषण और मूल्यांकन के जो प्रतिमान स्थापित किए, उनके आगे आज तक कोई बढ़ नहीं पाया। उनके समर्थन या विरोध की दिशा में जाने वाले रास्ते उनसे होकर ही गुजरते हैं। उन्होंने जिसे जहाँ बिठा दिया, वहाँ से उसे अभी तक कोई ऊपर-नीचे नहीं कर सका है। कोशिश बहुतों ने की। हिंदी समीक्षा को वैज्ञानिक तथा प्रौढ़ स्वरूप देने वाले वे प्रथम समीक्षक हैं। वे हिंदी के सही मायने में आचार्य हैं। उनके पहले की समीक्षा गुण-दोष-विवेचन तथा पुस्तक-समीक्षा तक ही सीमित थी । उनके द्वारा किए गए कार्यों का आकलन करने से यह बात सहज ही ख्याल में आ जाती है कि उन्होंने जबरदस्त तैयारी के साथ हिंदी आलोचना के क्षेत्र में कदम रखा था। उन्होंने साहित्य, दर्शन, इतिहास, मनोविज्ञान, विज्ञान आदि अनेक क्षेत्रों की अपने समय तक की नवीनतम उपलब्धियों को आत्मसात् करके हिंदी समीक्षा की नींव रखी थी।- भूमिका से

आचार्य रामचन्द्र शुक्लआचार्य रामचन्द्र शुक्लआचार्य रामचन्द्र शुक्ल (4 अक्टूबर, 1882-1942) बीसवीं शताब्दी के हिन्दी के प्रमुख `साहित्यकार थे। उनका जन्म बस्ती, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके द्वारा लिखी गयी पुस्तकों में प्रमुख है हिन्दी साहित्य का इतिहास, जिसका हिन्दी पाठ्यक्रम को निर्धारित करने में प्रमुख स्थान है। शुक्ल जी हिन्दी साहित्य के कीर्ति स्तम्भ हैं। हिन्दी में वैज्ञानिक आलोचना का सूत्रपात उन्हीं के द्वारा हुआ। हिन्दी निबन्ध के क्षेत्र में शुक्ल जी का स्थान बहुत ऊँचा है। वे श्रेष्ठ और मौलिक निबन्धकार थे। उन्होंने अपने दृष्टिकोण से भाव, विभाव, रस आदि की पुनर्व्याख्या की, साथ ही साथ विभिन्न भावों की व्याख्या में उनका पांडित्य, मौलिकता और सूक्ष्म पर्यवेक्षण पग-पग पर दिखाई देता है।शुक्ल जी की कृतियाँ :मौलिक कृतियाँ तीन प्रकार की हैं :आलोचनात्मक ग्रन्थ : सूर, तुलसी, जायसी पर की गयी आलोचनाएँ, काव्य में रहस्यवाद, काव्य में अभिव्यंजनावाद, रस मीमांसा आदि शुक्ल जी की आलोचनात्मक रचनाएँ हैं।निबन्धात्मक ग्रन्थ : उनके निबन्ध चिंतामणि नामक ग्रन्थ के दो भागों में संगृहीत हैं। चिंतामणि के निबन्धों के अतिरिक्त शुक्लजी ने कुछ अन्य निबन्ध भी लिखे हैं, जिनमें मित्रता, अध्ययन आदि निबन्ध सामान्य विषयों पर लिखे गये निबन्ध हैं। मित्रता निबन्ध जीवनोपयोगी विषय पर लिखा गया उच्चकोटि का निबन्ध है जिसमें शुक्लजी की लेखन शैलीगत विशेषताएँ झलकती हैं।ऐतिहासिक ग्रन्थ : हिन्दी साहित्य का इतिहास उनका अनूठा ऐतिहासिक ग्रन्थ है ।अनूदित कृतियाँ : शुक्ल जी की अनूदित कृतियाँ कई हैं। 'शशांक' उनका बांग्ला से अनुवादित उपन्यास है। इसके अतिरिक्त उन्होंने अंग्रेज़ी से विश्वप्रपंच, आदर्श जीवन, मेगस्थनीज का भारतवर्षीय वर्णन, कल्पना का आनन्द आदि रचनाओं का अनुवाद किया।सम्पादित कृतियाँ : सम्पादित ग्रन्थों में हिन्दी शब्दसागर, नागरी प्रचारिणी पत्रिका, भ्रमरगीत सार, सूर, तुलसी, जायसी ग्रन्थावली उल्लेखनीय हैं।

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us