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Tumhen Khojane Ka Khel Khelate Hue

by Vyomesh Shukla
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789389915976
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 136
  • Original Price: INR 199.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): General

हम जब कविता या कहानी लिखते हैं तो ऐसे कुछ ज़रूरी चेहरे दिमाग़ में रहते हैं जिनके बारे में या तो हमें यक़ीन होता है कि वे हमारे लिखे को पढ़ेंगे या कुछ चिन्ता होती है कि वे अगर पढ़ेंगे तो क्या कहेंगे। कहीं किसी जगह एक आदमी नज़र रखे हुए है। विष्णु खरे न सिर्फ़ मेरी पीढ़ी के बहुत से कवि-लेखकों के लिए, बल्कि हिन्दी में सक्रिय बहुत सारे दूसरे लोगों के लिए भी, ऐसा ही एक ज़रूरी चेहरा थे। वह कभी हमारे ख़यालों से दूर न रहे। उनका जाना एक ज़रूरी आदमी का जाना और एक दुखद ख़ालीपन का आना है। मेरी पीढ़ी ने एक आधुनिक दिमाग, तेज़ नज़र काव्य-पारखी, आलोचक, दोस्त, स्थायी रक़ीब और नयी पीढ़ी ने अपना एक ग़ुस्सेवर लेकिन ममतालु सरपरस्त खो दिया है। इस रूप में वह हमारे सबसे कीमती समकालीन थे। (विष्णु खरे पर एकाग्र अपने एक शोकलेख में असद ज़ैदी)

व्योमेश शुक्ल जन्म : 25 जून, 1980; वाराणसी में, यहीं बचपन और एम.ए. तक पढ़ाई। शहर के जीवन, अतीत, भूगोल और दिक्कतों पर एकाग्र निबन्धों और प्रतिक्रियाओं के साथ लिखने की शुरुआत । व्योमेश ने इराक़ पर हुई अमेरिकी ज़्यादतियों के बारे में मशहूर अमेरिकी पत्रकार इलियट वाइनबर्गर की किताब व्हाट आई हर्ड अबाउट इराक का हिन्दी अनुवाद किया, जिसे हिन्दी की प्रतिष्ठित पत्रिका पहल ने एक पुस्तिका के तौर पर प्रकाशित किया है। व्योमेश ने विश्वसाहित्य से नॉम चॉमस्की, हार्वर्ड ज़िन, रेमंड विलियम्स, टेरी इगल्टन, एडवर्ड सईद और भारतीय वांग्मय से महाश्वेता देवी और के. सच्चिदानन्दन के लेखन का अंग्रेज़ी से हिन्दी में अनुवाद किया है। व्योमेश शुक्ल का पहला कविता-संग्रह 2009 में राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है, जिसका नाम है फिर भी कुछ लोग। कविताओं के लिए 2008 में अंकुर मिश्र स्मृति पुरस्कार और 2009 में भारत भूषण अग्रवाल स्मृति सम्मान । आलोचनात्मक लेखन के लिए 2011 में रजा फाउंडेशन फेलोशिप और संस्कृति-कर्म के लिए भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता का जनकल्याण सम्मान मिला है। नाटकों के निर्देशन के लिए इन्हें संगीत नाटक अकादेमी का उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ युवा पुरस्कार दिया गया है। व्योमेश की कविताओं के अनुवाद विभिन्न भारतीय भाषाओं के साथ-साथ कुछ विदेशी भाषाओं में हुए हैं। अंग्रेज़ी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने अपने एक सर्वेक्षण में उन्हें देश के दस श्रेष्ठ लेखकों में शामिल किया है तो हिन्दी साप्ताहिक इंडिया टुडे ने उन्हें भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक दृश्यालेख में परिवर्तन करने वाली पैंतीस शख्सियतों में जगह दी है। लेखन के साथ-साथ व्योमेश बनारस में रहकर रूपवाणी नामक एक रंगसमूह का संचालन करते हैं। हाल ही में प्रकाशित उनकी दो किताबें-कविता-संग्रह काजल लगाना भूलना और आलोचना-पुस्तक कठिन का अखाड़ेबाज़ और अन्य निबन्ध-इन दिनों चर्चा में हैं। सम्पर्क: 9519138988, 7007946472 ईमेल : vyomeshshukla@gmail.com

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