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Uttar Pradesh Ki Lokkathayen

by Vidya Vindu Singh
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789355210203
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 160
  • Original Price: INR 300.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

भारत की सांस्कृतिक परंपराओं की विरासत यहाँ के सभी प्रदेशों की आंचलिक लोककथाओं में सुरक्षित हैं। ये कथाएँ परंपराओं के मूर्त, अमूर्त अवशेष के रूप में संस्कृति की शिक्षा देती रही हैं। ये धार्मिक समन्वय और अखंड भारत के स्वरूप का अध्ययन भी प्रस्तुत करती हैं।इस पुस्तक में हिंदी की पोषक उत्तर प्रदेश की जनपदीय लोकभाषाओं की कथाएँ हैं। उत्तर प्रदेश की मुख्य लोकभाषाएँ या हिंदी की बोलियाँ हैं— अवधी, आदिवासी, कौरवी, ब्रज, बुंदेली, भोजपुरी आदि। वही कथाएँ प्रायः सभी लोकभाषाओं में पाठ भेद के साथ मिलती हैं। उत्तर प्रदेश की सभी बोलियों, उपभाषाओं का लोककथा साहित्य रोचक, प्रेरक और समृद्ध है। यह दावा नहीं किया जा सकता कि कौन सी कथा किस बोली-क्षेत्र की है। सब में एक ही मूल भाव, लोकमंगल उपस्थित है। कथा के अंत में कहा जाता है कि ‘सबके अच्छे दिन बहुरे...’अर्थात् किसी के साथ बुरा न हो।संकलन में जो लोककथाएँ हैं, उनमें धार्मिक-पौराणिक कथाएँ, हास्य कथाएँ, नीति संबंधी कथाएँ, प्रकृति से जुड़ी कथाएँ तो हैं ही, व्रत-पर्व, त्योहारों से जुड़ी ऐसी कथाएँ भी हैं, जिनमें देवी-देवताओं के कथानक, उनकी महिमा और कृपा, व्रत के फल, विधि-विधान तथा व्रत-पर्वों के महत्त्व का वर्णन है।उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति, परंपराओं और मान्यताओं का दिग्दर्शन करवाती पठनीय लोककथाओं का संकलन।

विद्या विंदु सिंहजन्म : 2 जुलाई, 1945, ग्राम-जैतपुर, सोनावाँ, अंबेडकर नगर (उ.प्र.)।कृतियाँ : 118 प्रकाशित, 9 उपन्यास, 10 कहानी-संग्रह, 12 कविता संग्रह, 25 लोक साहित्य, 6 नाटक, 10 निबंध संग्रह, 1 साक्षात्कार, 23 नवसाक्षर एवं बाल-साहित्य, 23 संपादित; अन्य अनेक पुस्तकों और पत्रिकाओं का संपादन। 16 पांडुलिपियाँ प्रकाशनार्थ सुरक्षित आकाशवाणी, दूरदर्शन के विभिन्न केंद्रों से निरंतर प्रसारण। देश-विदेश की अनेक संस्थाओं, विश्वविद्यालयों से संबद्ध। अनेक विश्वविद्यालयों कृतित्व पर शोध-कार्य चेन्नई द्वारा।अनुवाद : सच के पाँव (कविता-संग्रह) का नेपाली में अनुवाद, साहित्य अकादेमी, दिल्ली द्वारा पुरस्कृत। मलयालम, मराठी, कश्मीरी, तेलुगु, बांग्ला, ओडि़या, जापानी, अंग्रेजी भाषाओं में अनुवाद। साहित्यिक आयोजनों में देश-विदेश में सक्रिय भागीदारी। देश-विदेश की 105 संस्थाओं द्वारा सम्मान एवं पुरस्कार। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ से संयुक्त निदेशक पद से सेवानिवृत्त।कई सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक संस्थाओं से संबद्ध रहते हुए साहित्य और समाज-सेवा।

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