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Vishwa Hindu Parishad Ke Shilpi : Dada Saheb Apte

by Dr. Kuldeep Chand Agnihotri
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789352665488
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
  • Publication Date:
  • Pages: 184
  • Original Price: INR 175.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 250 grams
  • BISAC Subject(s): Political

दादा साहेब आपटे के जीवन के बारे में किसी भी भाषा में लिखी गई यह पहली पुस्तक है। दादा साहेब आपटे अपने समय के उद्भट विद्वान् थे। उनकी पंद्रह से ज्यादा पुस्तकें अंग्रेजी व मराठी में प्रकाशित हुई थीं। लोकमान्य तिलक के मराठी दैनिक में वे नियमित लिखते थे। तमिलनाडु में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे। भारतीय भाषाओं की पहली संवाद समिति ‘हिंदुस्थान समाचार’ की स्थापना उन्होंने की थी। ‘विश्व हिंदू परिषद्’ के वे संस्थापक अध्यक्ष थे। वेद की स्थापना करने के लिए वे विश्व के अनेक देशों में गए। लेकिन अब तक उनकी कोई समग्र जीवनगाथा उपलब्ध नहीं थी। यह पुस्तक इसी कमी को पूरा करने का विनम्र प्रयास है। ‘हिंदुस्थान समाचार’ एवं विश्व हिंदू परिषद् की स्थापना की पृष्ठभूमि और निर्धारित दिशा का गंभीर आकलन पहली बार इस पुस्तक में हुआ है।

डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री साहित्य और समाज विज्ञान के क्षेत्र के जाने-माने हस्ताक्षर हैं। अभी हाल ही में जम्मू-कश्मीर को लेकर उनकी दो पुस्तकें, ‘जम्मू-कश्मीर की अनकही कहानी’ और ‘जम्मू-कश्मीर के जननायक महाराजा हरि सिंह’ खासी चर्चित रहीं। मध्यकालीन इतिहास से संबंधित अग्निहोत्री की पुस्तक ‘मध्यकालीन दशगुरु परंपरा-भारतीय इतिहास का स्वर्णिम पृष्ठ’ काफी सराही गई है। अग्निहोत्री ने लगभग पच्चीस देशों की यात्रा की और अपने संस्मरण ‘एक भारत और भी नाम’ से लिपिबद्ध किए। ईरान में पहलवीवंश की समाप्ति और खुमैनी के आगमन के दिनों के परिवर्तन काल में वे लगभग एक साल ईरान में थे और उन्होंने वहाँ के इन परिवर्तनों पर ‘ईरानी क्रांति और उसके बाद’ नाम से पुस्तक लिखी, जो इस विषय पर हिंदी में पहली मौलिक पुस्तक है। अध्ययन-अध्यापन के क्षेत्र में वे दस साल तक हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला में निदेशक रहे। विश्वविद्यालय में भीमराव आंबेडकर पीठ के अध्यक्ष रहे। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में विजिटिंग प्रोफेसर रहे। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के उपाध्यक्ष रहे। संप्रति : हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला में कुलपति हैं। स्थायी पता : चकमोह (हमीरपुर), हिमाचल प्रदेश

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