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Wah Kaun Thi?

by Sanjeev
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789388434195
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 92
  • Original Price: INR 200.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 150 grams
  • BISAC Subject(s): General

कसम खाकर कहती हूँ कि वह एक कयामत की रात थी। आज भी याद करती हूँ तो सिहर-सिहर उठती हूँ, जैसे किसी साँप की जीभ सहला-सहला जाये ! जान में जान तब आयी जब बोगी के कंडक्टर ने आकर हमें बताया, " रब का शुकर मनाओ जी कि ख़तरा टल गया।” “पर क्या वाक़ई कोई टेरारिस्ट एटेम्प्ट था या सिर्फ...?” बहुत कुछ पूछना चाहते थे हम, मगर कंडक्टर ने हमें बोलने का मौका ही न दिया, “ये टाइम बहोत ख़राब है जी, कब हक़ीक़त अफवाह बन जाये, कब अफवाह हकीकत, ख़तरा तो टल गया लगता है, पर ख़तरा तो कभी भी आ सकता है जी । एहतियातन एलर्ट ही रहें तो अच्छा।” कंपार्टमेंट की बुझी बत्तियाँ जल उठीं। लगा, हम एक लम्बी काली सुरंग से बाहर निकले हैं।''वह कौन थी?' कहानी का अंश

संजीव38 वर्षों तक एक रासायनिक प्रयोगशाला, 7 वर्षों तक 'हंस' समेत कई पत्रिकाओं के सम्पादन और स्तम्भ लेखन से जुड़े संजीव का अनुभव संसार विविधता से भरा हुआ है, साक्षी हैं उनकी प्रायः 150 कहानियाँ, 13 उपन्यास और विविध लेखन। इसी विविधता और गुणवत्ता ने उन्हें पाठकों का चहेता बनाया है। इनकी कुछ कृतियों पर फ़िल्में बनी हैं, कई कहानियाँ और उपन्यास विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों के पाठ्यक्रमों में शामिल हैं। अपने समकालीनों में सर्वाधिक शोध भी उन्हीं की कृतियों पर हुए हैं। 'कथाक्रम', 'पहल', 'अन्तरराष्ट्रीय इन्दु शर्मा स्मृति-सम्मान', 'सुधा स्मृति सम्मान' समेत अनेक पुरस्कारों से सम्मानित...। नवीनतम है हिन्दी साहित्य के सर्वोच्च सम्मानों में से एक इफको का 'श्रीलाल शुक्ल स्मृति साहित्य सम्मान'-2013।अगर कथाकार संजीव की भावभूमि की बात की जाये तो यह उनके अपने शब्दों में ज्यादा तर्कसंगत, सशक्त और प्रभावी होगा- “मेरी रचनाएँ मेरे लिए साधन हैं, साध्य नहीं। साध्य है मानव मुक्ति।”सम्प्रति : स्वतन्त्र लेखन

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