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Yahi Hai Rasta

by Ramgopal Sharma 'Dinesh'
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Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9788181434685
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 120
  • Original Price: INR 150.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 3rd Edition
  • Item Weight: 350 grams
  • BISAC Subject(s): General

यही है रास्ता -चन्दन और प्रतिमा के प्यार की अत्यन्त संवेदनशील कहानी - छात्र जीवन में वे एक-दूसरे के जितने निकट आये सामाजिक उपेक्षाओं ने उन्हें उतना ही दूर फेंक दिया.. चन्दन विवश हो गया दस्यु जीवन बिताने के लिए... बढ़ती चली आयी अन्यायों और अपराधों की जकड़ती श्रृंखलाएँ... जाति, धन, धर्म और क़ानूनों का दुरूपयोग.. भ्रष्टाचार और समाज-द्रोह के काले कारनामे... पनपते गये अनेक दस्यु दल... आवेश में आकर अपराध कर डालने वाले लोगों के लिए खुलते गये बन्दूक़ और जंगल के रास्ते.. पुलिस की काली किताबों में दर्ज होते गये वे लोग.. उनकी मुक्ति का या उनसे मुक्ति का कोई रास्ता?लेखक ने ग्यारह वर्षों तक सर्वोदय आन्दोलन में वैचारिक तौर पर भाग लिया, आचार्य विनोबा जी के कार्यक्रमों का समर्थन किया.. "सर्वोदय के गीत" काव्य लिखा.. प्रथम दस्यु समर्पण के समय उरंगम नदी से चम्बल तक के शिविरों में विनोबा जी के साथ रहा.. उससे पूर्व लिखी जा चुकी थी चन्दन और प्रतिमा की यह कहानी, जो दस्यु समर्पण की गाँधीवादी विचारधारा के प्रत्यक्ष घटित होते दर्शन से परिपुष्ट होकर चिन्तनशील पाठकों के हाथों में हैं.. चन्दन एक ऐसा पात्र जो बाहर से विषैले नागों से घिरा रहा, किन्तु भीतर भीतर बदलता गया शीतल चन्दन में दस्यु से संन्यासी.. और समर्पण का सूत्रधार.. जो मिलता है हिमाच्छादित अमरनाथ के मार्ग में शेषनाग नदी के किनारे संन्यासिनी प्रतिमा से.. हिन्दी का दस्यु समस्या पर प्रथम आंचलिक उपन्यास, जिसकी कथा राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बीहड़ों, कगारों, घाटियों से घूमती हुई भारत की सांस्कृतिक ऊँचाइयों तक पाठक को ले जाती है.. आरंभ से अंत तक अन्यंत रोचक, मार्मिक, उद्बोधक... चिन्तन की परिधि को उदात्त बनाकर यथार्थ और आदर्श की नई दृष्टियों के सहारे उत्तरोत्तर ऊँचा उठाती है.. मार्मिक व्यंजना से भरी इसकी सुबोध भाषा, जीवन को एक नया संबोध देने वाले शिल्प से रची गयी है... निश्चय ही चन्दन और प्रतिमा के उदात्त प्रेम की लुकती-छिपती तस्वीरें आपके मानस और मनीषा को वर्षों तक झकझोरती रहेंगी।

डॉ. रामगोपाल शर्मा 'दिनेश' - जन्म : 5 जुलाई, 1929, ग्राम सिधावली, ज़िला आगरा, उ.प्र.। शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी, संस्कृत), पीएच.डी., डी.लिट्।हिन्दी शिक्षण : सन् 1951 से हिन्दी भाषा एवं साहित्य का शिक्षण। हिन्दी विभाग के आचार्य अध्यक्ष एवं संकाय के अधिष्ठाता के पदों पर कार्य करके मो. ला. सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर (राज.) से सन् 1989 में सेवानिवृत्त, तत्पश्चात् भीली भाषा पर शोध कार्य अधुना स्वतन्त्र लेखन।साहित्य सेवा : प्रकाशित प्रमुख मौलिक 123 ग्रन्थ।प्रबन्ध-काव्य : सारथी (महाकाव्य), विश्व ज्योति बापू, उत्सर्ग, दुर्वासा, हिमप्रिया (खंडकाव्य)। गीत-संग्रह: वीरांगना, संघर्षों के राही, जलती रहे मशाल, जयघोष, गौरवगान, सर्वोदय के गीत, जले शौर्य का दीप, मधुरजनी, रूपगन्धा इत्यादि।नयी कविता : आयाम, अहं मेरा गेय, साक्षी है सूर्य, यह तुम्हारा गाँव है। विशेष चयन : हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग द्वारा प्रकाशित पन्त, महादेवी आदि की श्रृंखला में देव पुरस्कार ग्रन्थावली में 'आधुनिक कवि-20'। नाटक : धरती का देवता, लोकदेवता जागा, कुणाल, पृथ्वीराज, द्रोण का शिष्य, हिमपुरुष की हत्या, टूटे हुए सेतु, लौट आओ वासंती, आस्था का सूर्य। कथा-साहित्य : राह और रोशनी, हम धरती के लाल, चौराहे का आदमी। निबन्ध-संग्रह : शोध और समीक्षा, मीमांसा और मूल्यांकन, साहित्य के नये सन्दर्भ, साहित्य का परिवेश और चेतना। प्रमुख शोध एवं आलोचना-ग्रन्थ : हिन्दी काव्य में नियतिवाद, हिन्दी शिवकाव्य का उद्भव और विकास, कामायनी का नया अन्वेषण, हिन्दी साहित्य का समीक्षात्मक इतिहास, मानविकी शोध-प्रविधि, हिन्दी भाषा और उसका इतिहास, आधुनिक प्रतिनिधि कवि, सूरति मिश्र ग्रन्थावली (चार खंड), प्रेमचन्द का गोदान इत्यादि।पुरस्कार : भारत सरकार से नाटक-पुरस्कार, राजस्थान साहित्य आकादमी से तीन बार काव्य पुरस्कार व एक बार आलोचना पुरस्कार, उ.प्र. से विशेष तुलसी पुरस्कार तथा महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन से कुंभा पुरस्कार, उ.प्र. हिन्दी संस्थान का लोकभूषण।पत्रकारिता : 'सैनिक' (दैनिक), विशाल भारत (मासिक) के सहायक एवं सरस्वती संवाद (त्रैमासिक) तथा समीक्षालोक (द्वैमासिक) के प्रधान संपादक रहे। हिन्दी की सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाएँ 1943 से छपती आ रही हैं।विदेश यात्रा : रूस, जापान, कोरिया, थाईलैंड, चीन, जर्मनी, मारीशस, नेपाल आदि देशों में हिन्दी भाषा एवं साहित्य पर व्याख्यान दे चुके हैं।सम्मान : अनेक संस्थाओं द्वारा अभिनन्दन तथा सम्मानोपाधियाँ प्रदान की गयी हैं।सदस्यता : सरकारी तथा विश्वविद्यालयों की कई समितियों के सदस्य रहे हैं एवं अधुना है। कृषि मन्त्रालय एवं मानव संसाधन विकास मन्त्रालय की हिन्दी क्रियान्वयन समिति के पूर्व सदस्य, कोयला मन्त्रालय एवं शहरी विकास मन्त्रालय की राजभाषा- समिति के अधुना सलाहकार सदस्य (भारत सरकार) हैं।

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