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Yuddh Yatra

by Dharamveer Bharti
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789387648234
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 120
  • Original Price: INR 199.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 3rd Edition
  • Item Weight: 200 grams
  • BISAC Subject(s): General

यद्ध के मैदान में वीर सैनिकों तथा सैनिक अफसरों के साथ स्वयं लेखक धर्मवीर भारती उपस्थित रहे है। युद्ध का आखों देखा वर्णन रिपोर्ताज के रूप में विश्व साहित्य में पहली बार प्रस्तुत है। -प्रकाशक / 1971 के युद्ध की रोमांचक एवं लोमहर्षक दास्तान प्रख्यात लेखक एवं सम्पादक धर्मवीर भारती की कलम से, जहाँ उन्होंने भारत एवं पाकिस्तान के मध्य हुए इस ऐतिहासिक युद्ध का आँखों देखा हाल पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया है। इस ऐतिहासिक पुस्तक में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम एवं पाकिस्तानी पराभव की पल-पल की कथा रिपोर्ताज शैली में दर्ज की गयी है। भारतीय शूरवीरों के पराक्रम एवं कूटनीति का एक तथ्यपरक मर्मस्पर्शी एवं विश्वसनीय लेखाजोखा जो हिन्दी साहित्य के एक कालजयी लेखक द्वारा स्वयं युद्धभूमि में मौजूद रह कर लिखा गया है। हिन्दी साहित्य के इतिहास में यह युद्ध-रिपोर्ताज अपने विशद् विवरण, रचनात्मक भाषा एवं विश्वसनीय तथ्यों की वजह से अपने आप में अद्वितीय है।

धर्मवीर भारती जन्मः इलाहाबाद में 25 दिसम्बर, 1926 को। बचपन में पिता की मृत्यु हो जाने से किशोरावस्था से ही गहरा आर्थिक संघर्ष। 1945 में प्रयाग विश्वविद्यालय में हिन्दी में सर्वाधिक अंक प्राप्त कर ‘चिन्तामणि घोष’ पदक जीता और 1946 में हिन्दी में प्रथम श्रेणी में एम.ए.। उसी बीच में आजीविका के लिए ‘अभ्युदय' तथा 'संगम' में उप-सम्पादक रहे। डॉ. धीरेन्द्र वर्मा के निर्देशन में ‘सिद्ध साहित्य पर शोध कर 1954 में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की और विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग में प्राध्यापक नियुक्त हुए। उन्हीं दिनों ‘परिमल' संस्था में सक्रिय तथा कविता, नाटक, उपन्यास, कहानी, समीक्षा अनेक विधाओं में महत्त्वपूर्ण लेखन। सन् 1960 में ‘धर्मयुग' के प्रमुख सम्पादक बनकर बम्बई आये और 1987 तक सम्पादन कर पत्रकारिता में एक विशिष्ट सांस्कृतिक मानदण्ड स्थापित किया। अब तक लगभग एक दर्जन यशस्वी कृतियाँ प्रकाशित। इंग्लैंड, पश्चिम जर्मनी, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मॉरिशस, चीन तीन बार तथा बांग्लादेश की यात्राएँ। अलंकरण : 1972 में पद्मश्री तथा अनेकानेक पुरस्कारों (राजेन्द्र प्रसाद शिखर सम्मान, बिहार; भारत भारती सम्मान, उ.प्र.; महाराष्ट्र गौरव; तथा कौडिया न्यास पुरस्कार आदि) से सम्मानित। निधन : 4 सितम्बर 1997।

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