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Yuva Gandhi Ki Kahaniyan

by Janhavi Prasad
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789389563085
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Vani Prakashan
  • Publisher Imprint: Vani Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 216
  • Original Price: INR 299.0
  • Language: Hindi
  • Edition: 2nd Edition
  • Item Weight: 450 grams
  • BISAC Subject(s): Literary

मोहन गाँधी ने अपने सहयोगियों के आग्रह पर 1920 में अपनी आत्मकथा लिखने का निर्णय किया। उनकी पुस्तक ‘माई एक्सपेरिमेंट विद ट्रूथ' में सत्यता से प्रेरित उनके अनुभवों के क़िस्सों ने संसार में प्रत्येक आयु व वर्ग के लोगों को प्रभावित किया। गाँधी जी की आत्मकथा को पढ़ने के बाद जाह्नवी प्रसाद भी उनके असाधारण कार्यों से प्रेरित हुए बिना न रह सकीं और वह भलीभाँति समझ गयी कि गाँधी के विचार, उनके सच्चाई, अहिंसा, साधारण जीवन, स्वच्छता को लेकर दिये गये सन्देश आज के युग में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। इसके बाद आठ वर्षों तक जाह्नवी प्रसाद ने लन्दन, साउथ अफ्रीका, पोरबन्दर, नोआखाली का भ्रमण किया व गाँधी जी से सम्बन्धित दुर्लभ सामग्री की खोज के परिणामस्वरूप वह गाँधी जी पर विस्तृत रूप में ग्राफ़िक उपन्यास की रचना करने में सफल रहीं। इस युग के युवा पाठकों को महात्मा गाँधी व उनकी जीवन-शैली से परिचित कराना ही जाह्नवी जी का मुख्य उद्देश्य है।

जाह्नवी प्रसाद -दिल्ली में जन्मी जाह्नवी प्रसाद के बचपन का अधिकांश समय कुमाऊँ के नैनीताल शहर व तराई क्षेत्र के पास बसे शाहजहाँपुर शहर (उ.प्र.) में बीता।वह प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शान्ति दूत के रूप में कार्य करती हैं। वह उत्तराखण्ड में साहित्य, संगीत, वस्त्र उद्योग, कुमाऊँनी खाना, प्राचीन स्मारकों व स्वास्थ्य, पर्यावरण से जुड़ी जानकारी देने और संरक्षण के लिए समर्पित हैं।युवा गाँधी की कहानियाँ (टेल्स ऑफ़ यंग गाँधी) उनकी पहली पुस्तक है, जो उन्होंने हिमालय की तलहटी में कुमाऊँ की पहाड़ियों में बसे नैनीताल शहर के अपने पैतृक घर प्रसादा भवन में रहकर लिखी। प्रसादा भवन आजकल हैरिटेज होम ऐबटसफ़ोर्ड के नाम से जाना जाता है।

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