Skip to content

Booksellers & Trade Customers: Sign up for online bulk buying at trade.atlanticbooks.com for wholesale discounts

Booksellers: Create Account on our B2B Portal for wholesale discounts

Hindi Aalochana: Drishti Aur Pravritiyan

by Manoj Pandey
Save 30% Save 30%
Current price ₹350.00
Original price ₹500.00
Original price ₹500.00
Original price ₹500.00
(-30%)
₹350.00
Current price ₹350.00

Ships in 7-10 Days

Free Shipping in India on orders above Rs. 500

Request Bulk Quantity Quote
+91
Book cover type: Hardcover
  • ISBN13: 9789386863324
  • Binding: Hardcover
  • Subject: N/A
  • Publisher: Lokbharti Prakashan
  • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 228
  • Original Price: INR 500.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 96 grams
  • BISAC Subject(s): General

प्रस्तुत पुस्तक “हिंदी आलोचना : दृष्टि और प्रवृतियाँ” के अंतर्गत समूची हिंदी आलोचना की परख-पड़ताल आलोचकों की रचना-दृष्टि के साक्ष्य पर करने का प्रयास किया गया है ! दरअसल, आलोचकों के कृतित्व को केंद्र में रखते हुए रचना-आलोचना के गतिमान तत्वों की पहचान ही लेखक का ध्येय रहा है ! इसलिए आलोचना के इतिहास को रेखांकित करने के बजाय यहाँ आलोचकों की गवाही पर उसको प्रभावित करने वाले कारको को उद्घाटित करने का प्रयास हुआ है ! हिंदी आलोचना के शलाका-पुरुष आचार्य शुक्ल से लेकर रचनाकार-आलोचक रमेशचंद्र शाह तक की आलोचना-दृष्टि की विवेचना करते हुए उन पक्षों को रेखांकित करने का प्रयास किया गया है, जो आलोचना के विकास को चिन्हित करते हैं ! साथ ही, आलोचना की उन प्रवृतियों पर भी यहाँ विचार किया गया है, जिनका सन्दर्भ भारतीय हो या पाश्चात्य, जिन्होंने हिंदी आलोचना को गहरे तक प्रभावित किया है ! शास्त्रीय परम्परावादी, तुलनात्मक, समाजशास्त्रीय पद्धति से लेकर उत्तर आधुनिक विमर्शो तक पर विचार करना पुस्तक का उद्देश्य है|

मनोज पाण्डेयसन 1974 में इलाहबाद में जन्मे मनोज पाण्डेय हिंदी आलोचना, प्रयोजनमूलक हिंदी और मीडिया के अध्ययन-अच्यापन में विशेष अभिरूचि रखते हैं |साहित्य सेवा : साहित्य से जुड़े नये प्रसंगों, नये विमर्शो पर सतत चिंतन-लेखन | इन अनुशासनों पर 8 पुस्तकें तथा कई शोध लेख एवं आलेख प्रकाशित |गतिविधियाँ : केन्द्रीय हिंदी संसथान, आगरा में कुछ वर्ष अध्यापन | माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल की ‘स्वतंत्र भारत की पत्रकारिता’ विषयक शोध परियोजना से सम्बद्ध रहे | बरकतुल्लाह विश्विद्यालय, भोपाल से जुड़कर यूनिसेफ दारा वित्तपोषित एक परियोजना में भी कुछ समय कार्य किया |सम्प्रति : राष्ट्रसंत तुक्डोजी महाराज नागपुर विश्विद्यालय के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग में अध्यापन |

Trusted for over 49 years

Family Owned Company

Secure Payment

All Major Credit Cards/Debit Cards/UPI & More Accepted

New & Authentic Products

India's Largest Distributor

Need Support?

Whatsapp Us