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Sudhiyan Us Chandan Ke Van Ki

by Vishnukant Shastri
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789390625185
  • Binding: Paperback
  • Subject: Hindi Literature
  • Publisher: LokBharti Prakashan
  • Publisher Imprint: LokBharti Prakashan
  • Publication Date:
  • Pages: 144
  • Original Price: INR 160.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 16 grams
  • BISAC Subject(s): General

मैं इस दृष्टि से भाग्यवान् हूँ कि मुझे विविध क्षेत्रों के सत्पुरुषों का स्नेह-सौहार्द मिलता रहा है। जिन विशिष्ट व्यक्तियों के संपर्क से या स्थानों के भ्रमण से जीवन समृद्ध हुआ है, उनकी याद बार-बार आती ही है। हर बार लगता है कि उस याद ने अपनी सुगन्ध से जीवन को पुन: सुरभित कर दिया। वस्तुत: घटनाएँ जब घटती हैं तब उनका प्रभाव किन-किन स्तरों पर कितनी गहराई से पड़ रहा है, इसका सम्यक बोध नहीं हो पाता। उन प्रीतिकर स्मृतियों का रोमन्थन ही स्पष्ट करता है कि उन व्यक्तियों या घटनाओं ने जीवन को कितनी प्रेरणा और स्पूर्ति प्रदान की थी। उनके प्रति कृतज्ञता-बोध ही मुझे उनकी स्मृतियों को लिपिबद्ध करने को उत्साहित करता रहा है। इस तरह ये संस्मरण लिखे जाते रहे।

विष्णुकान्त शास्त्री जन्म : २ मई १९२९, कलकत्ता। शिक्षा : एम.ए., एल-एल.बी.। वृत्ति : १९५३ से कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्राध्यापक से आचार्य के पद से मई १९९४ को अवकाश ग्रहण। मौलिक कृतियाँ : कवि निराला की वेदना तथा अन्य निबन्ध, कुछ चंदन की कुछ कपूर की, चिन्तन मुद्रा, अनुचिन्तन (साहित्य समीक्षा), तुलसी के हिय हेरि (तुलसी केन्द्रित निबन्ध), बांग्लादेश के सन्दर्भ में ’रिपोर्ताज), स्मरण को पाथेय बनने दो, सुधियाँ उस चन्दन के वन की (संस्मरण एवं यात्रा वृत्तान्त), अनंत पथ के यात्री : धर्मवीर ‘भारती’ (संस्मरण), भक्ति और शरणगति (विवेचन), ज्ञान और कर्म (ईशावास्य प्रवचन), जीवन पथ पर चलते-चलते (काव्य)। गतिविधियाँ : देश-विदेश की विविध साहित्यिक संस्थाओं में व्याख्यान, विविध साहित्यिक संस्थाओं में व्याख्यान, विविध साहित्यिक सम्मानों एवं पुरस्कारों से समादृत। १९४४ से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सम्बद्ध, १९७७ से सक्रिय राजनीति में प्रवेश। जनता पार्टी के सदस्य के रूप में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधायक (१९७७-१९८२), पं. बंगाल प्रदेश भाजपा के दो बार अध्यक्ष, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (१९८८-१९९३), संसद सदस्य-राज्ययसभा (१९८२ से १९९८), २ दिसम्बर १९९९ को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल नियुक्त, २४ नवम्बर २००० से २ जुलाई २००४ तक उत्तर प्रदेश के राज्यपाल। निधन : १७ अप्रैल, २००५

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