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Swapn Samay

by Savita Singh
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Book cover type: Paperback
  • ISBN13: 9789349159273
  • Binding: Paperback
  • Subject: N/A
  • Publisher: Radhakrishna Prakasan Pvt Ltd
  • Publisher Imprint: Radhakrishna Prakasan Pvt Ltd
  • Publication Date:
  • Pages: 127
  • Original Price: INR 250.0
  • Language: Hindi
  • Edition: N/A
  • Item Weight: 160 grams
  • BISAC Subject(s): N/A

‘स्वप्न समय’ सविता सिंह की महत्त्वपूर्ण कविताओं का संग्रह है। इस संग्रह में सविता अपने चिन्तन, सरोकारों, सौन्दर्यबोध व भाषा के विशिष्ट उपकरणों के साथ नए इलाक़ों का सन्धान करती हैं, जोखिम उठाती हैं और आख़िरकार जो मुमकिन करती हैं, वह दुर्लभ है। इन कविताओं की विरलता उस धरातल पर है जहाँ अतीत कवयित्री के अनुभव और अभिप्राय में एक जीवित कारक सरीखा प्रकट होता है; स्मृति एक उद्द्दाम प्रवाह की तरह गहरे अन्तर्संघर्षों से संपृक्त है और सारे रूपाकारों और बिम्बों को सहेजकर एक अनूठी वसुधा को सिरजती है। इन कविताओं में वास्तव-वर्तमान स्वप्न के जिन धागों, रंगों व रंगतों से आच्छादित है वे हिन्दी के सांस्कृतिक बोध को निश्चय ही सम्पन्नतर बनानेवाले हैं। ‘स्वप्न समय’ में हिंसा और करुणा, यथार्थ और कल्पना तथा सार्वजनिक और एकान्तिक की अन्तर्क्रिया का एक द्वन्द्वात्मक रचाव है जो कभी एक प्रगाढ़ और अर्थ-गम्भीर मौन रचता है तो कभी एक संश्लिष्ट निनाद जिसके आशय में स्थायी अनुगूँजों का वास है। यह स्त्री के अस्तित्व और यथार्थबोध की ऐसी समग्र दुनिया है जहाँ यातना, पीड़ा तथा अवसाद के बरक्स आशा-आकांक्षा, स्वप्न और नई निर्मितियों की तृप्ति और उल्लास भी सहज सहजीविता में उपस्थित है। अस्मिताओं की मुक्ति की छटपटाहट और अभिव्यक्ति की उत्कट आकांक्षा के बीच स्त्री-मुक्ति की सार्वभौम आवाज़ ने समाजों और संस्कृतियों में जो जगह बनाई है वह हिन्दी कविता में भी महसूस की जा सकती है। सविता सिंह ने इस नई ज़मीन पर सर्वाधिक सामर्थ्य के साथ अपने काव्य व्यक्तित्व को निर्मित किया है। ‘अपने जैसा जीवन’ और ‘नींद थी और रात थी’ के बाद ‘स्वप्न समय अब उनकी नैसर्गिक शक्तिमत्ता के विलक्षण आख्यान के समान हमारे सम्मुख है। इस संग्रह की कविताओं में अनेक ऐसी कविताएँ हैं जिनमें स्त्री के चेतन, उप-चेतन या अवचेतन की वह अप्रकाशित और नीम-अँधेरी दुनिया है जो ‘प्रकट होकर विकट हो’ जाने को आतुर है। यह दीगर है कि सविता ने इस दुनिया को असीम स्वप्नों में ढालकर स्त्री के कई-कई जन्मों और पुनर्जन्मों की वाहिका, भोक्ता और साक्षी बनने का अभूतपूर्व और सफल उद्यम किया है। स्वप्न समय की कवयित्री का यह काव्य उद्यम इस अर्थ में अप्रतिम है कि यहाँ स्वप्नमयता, फन्तासी और सघन बिम्ब मालाएँ, सब उसी यथार्थ का विस्तार हैं जिसमें ‘अपने जैसा जीवन’ जीते हुए रचना की नवोन्मेष-भरी समृद्धि उपलब्ध की गई है। यही वह कारण है जिससे ‘स्वप्न समय’ की ऊर्जस्वित प्राणवत्ता नितान्त मौलिक है—कालातीत गरिमा से दीप्त और अक्षुण्ण।

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